उज्जैन. हिंदू धर्म में हरतालिका तीज को बेहद खास माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. पंचांग के अनुसार, यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.
धार्मिक मान्यता है कि हरतालिका तीज का व्रत करने से जीवन में आ रही तमाम तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलती है, साथ ही वैवाहिक जीवन सुखमय भी रहता है. हरतालिका तीज का व्रत करने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करने से व्रत पूर्ण माना जाता है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन महिलाओं को किन बातों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 बजे होगा. उदयातिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर दिन सोमवार को रखा जाएगा.
हरतालिका तीज का पौराणिक महत्व
हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं. इस व्रत का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से माना जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे लेकिन पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में चाहती थीं. तब उनकी सखियां उन्हें घने जंगल में ले गईं. वहां उन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया. इसके बाद दोनों का विवाह हुआ.
इन 8 नियमों का जरूर करें पालन
1. हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाएं गलती से भी क्रोध न करें. अगर वे ऐसा करती हैं, तो उनका व्रत अधूरा माना जाएगा.
2. हरतालिका तीज का व्रत रखने का संकल्प करने के बाद भूल से भी या व्रत नहीं तोड़ना चाहिए. ऐसा करने से सौभाग्यशाली स्त्रियों को कई तरह के अशुभ परिणाम भी देखने को मिलते हैं.
3. हरतालिका तीज के दौरान महिलाओं को अपने मन में किसी तरह का गलत विचार नहीं लाना चाहिए, अर्थात किसी के भी प्रति गलत भावना न रखें और भूलकर भी किसी को भला-बुरा न कहें.
4. व्रत रखने वाली महिलाओं को रात्रि में सोना नहीं चाहिए. पूरी रात जागरण करते हुए भगवान शिव की कथा सुननी चाहिए. शिव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए.
5. हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन होता है. यह निर्जला व्रत होता है, यानी कि व्रती महिलाएं इस दिन जल तक ग्रहण नहीं कर सकती हैं. अगर किसी महिला ने पानी पी लिया, तो व्रत खंडित हो जाता है.
6. इस दिन महिलाओं को काले रंग से परहेज करना चाहिए. काले रंग की चूड़ियां और कपड़े नहीं पहनना चाहिए.
7. इस दिन महिलाओं को बड़े-बुजुर्गों को भूलकर भी अपमानित नहीं करना चाहिए बल्कि उनके पैर छूकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
8. ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भी कुंवारी या विवाहित महिला एक बार इस व्रत को रखना शुरू कर देती है, तो उसे जीवनभर यह व्रत रखना ही होता है. बीमार होने पर दूसरी महिला या पति इस व्रत को रख सकता है. जिन महिलाओं ने व्रत रखा है, उन्हें व्रत नहीं तोड़ना चाहिए, ऐसा करना अशुभ माना जाता है.



















