बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग अब कैंपस के कार्यक्रम से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गई है। स्क्रीनिंग टाले जाने के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। ABVP ने इसे स्थायी रूप से रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, तो कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने संगठन पर तीखा पलटवार करते हुए उमर खालिद को ‘राष्ट्रवादी’ बताया है।
Umar Khalid Documentary : स्क्रीनिंग टली, लेकिन विवाद और गहरा गया
बेंगलुरु स्थित NLSIU में उमर खालिद से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुली राजनीतिक बयानबाजी में बदल चुका है। समाचार एजेंसी ANI X पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने ABVP के विरोध पर कड़ा हमला बोला और कहा कि उमर खालिद राष्ट्रवादी हैं। उन्होंने ABVP की ओर से खालिद पर टिप्पणी किए जाने के अधिकार पर भी सवाल खड़े किए।
हरिप्रसाद ने ABVP पर निशाना साधते हुए नाथूराम गोडसे का संदर्भ दिया और संगठन की विचारधारा तथा उसके नैतिक अधिकार पर सवाल उठाए। उनका बयान ऐसे समय आया है जब डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक और वैचारिक खींचतान तेज हो चुकी है।
मामला सिर्फ एक फिल्म की स्क्रीनिंग का नहीं रह गया है। इसके केंद्र में यह सवाल है कि विश्वविद्यालयों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों, पुस्तकों और चर्चाओं के लिए कितनी जगह होनी चाहिए और किसी छात्र संगठन को किसी कार्यक्रम को रोकने की मांग करने का अधिकार किस सीमा तक है।
आयोजकों ने क्या कहा?
दिलचस्प बात यह है कि NLSIU की Law and Society Committee ने स्क्रीनिंग को रद्द करने के बजाय फिलहाल स्थगित किया है। कार्यक्रम 14 सितंबर को होना था। आयोजकों ने इसके पीछे सुरक्षा और प्रशासनिक-लॉजिस्टिक कारण बताए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि कार्यक्रम को किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं टाला गया है और इसे मौजूदा ट्राइमेस्टर के भीतर दोबारा आयोजित किए जाने की संभावना है।
स्क्रीनिंग के साथ एक चर्चा भी प्रस्तावित थी, जिसमें प्री-ट्रायल हिरासत, जमानत और असहमति जैसे कानूनी तथा लोकतांत्रिक मुद्दों पर बातचीत होनी थी। इस वजह से आयोजन को महज फिल्म प्रदर्शन के बजाय कानून और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़ी चर्चा के रूप में भी देखा जा रहा था।
Prisoner No. 626710 is Present: किस डॉक्यूमेंट्री पर है पूरा विवाद?
विवादित फिल्म का नाम ‘Prisoner No. 626710 is Present’ है और इसका निर्देशन फिल्मकार ललित वचानी ने किया है। फिल्म उमर खालिद की गिरफ्तारी, जेल में बिताए समय और उनके मामले से जुड़े घटनाक्रम पर केंद्रित है। फिल्म 2024 में बनी और करीब 60 मिनट लंबी है। इसके आधिकारिक विवरण के अनुसार इसमें खालिद की गिरफ्तारी और उनके आसपास घटे राजनीतिक घटनाक्रम को उनके परिचितों और उपलब्ध सामग्री के माध्यम से देखा गया है।
खालिद को सितंबर 2020 में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर UAPA के तहत मामला दर्ज है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। बाद में जुलाई 2026 में दिल्ली की अदालत ने भी उनकी नई जमानत याचिका पर राहत देने से इनकार किया।
हालांकि, मई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने खालिद को उनकी मां की सर्जरी के मद्देनजर 1 से 3 जून तक तीन दिन की अंतरिम जमानत दी थी। यह राहत नियमित जमानत से अलग थी और अदालत ने उस पर कई शर्तें भी लगाई थीं।



















