Trending: 100 साल से भी ज्यादा समय के लंबे इंतजार के बाद, वैज्ञानिकों ने बिल्ली की एक नई प्रजाति खोजी है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. यह दिखने में बिल्कुल किसी खूंखार तेंदुए जैसी है, लेकिन उसका वजन आम पालतू बिल्ली से भी कम है. सिर से लेकर पूंछ के अंत तक, सिर्फ 18 इंच लंबी इस बिल्ली को साइंटिस्ट्स ने लियोपार्डस तिलकायो नाम दिया है.

किसे, कैसे और कहां मिली यह बिल्ली?

इन सवालों का जवाब दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया की एक कहानी से मिलता है. साल 2017 में वहां एक स्थानीय शख्स को सड़क किनारे जंगल में एक बिल्ली का बच्चा मिला था. उसने उसे कोई आम पालतू बिल्ली समझकर घर में रख लिया. लेकिन, एक साल तक पालने के बाद जब उसे एहसास हुआ कि यह पूरी तरह से एक जंगली जीव है, तो उसने इसे सेंडा वर्डे एनिमल रिफ्यूज नाम की एक स्थानीय सैंक्चुअरी को सौंप दिया.

‘पहले लगा कि ये एक आम टाइगर कैट है’

नेशनल ज्योग्राफिक की रिपोर्ट के मुताबिक, जब बायोलॉजिस्ट पाओला नोगालेस-अस्कारुंज इस बिल्ली को देखने सैंक्चुअरी पहुंचीं, तो इसे देखकर दंग रह गईं. इसका चेहरा छोटा और सिकुड़ा हुआ था, कान गोल थे, मूंछें लंबी थीं और शरीर पर तेंदुए जैसे बड़े-बड़े धब्बे थे. शुरुआत में पाओला ने इसे टाइगर कैट की एक आम प्रजाति मान लिया था. लेकिन 2019 में एक किताब लिखते समय उन्होंने ध्यान दिया कि इस बिल्ली के शरीर पर बने धब्बे, पड़ोसी देश ब्राजील में पाई जाने वाली टाइगर कैट से काफी बड़े और अलग हैं.

डीएनए टेस्ट से खुला 14 लाख साल पुराना राय

इस शक के आधार पर जब ब्राजील और बेल्जियम के साइंटिस्टों ने साथ मिलकर इसके डीएनए और जीनोम की जांच की, तो नतीजे चौंकाने वाले थे. पता चला कि यह पहले से मौजूद किसी बिल्ली की उप-प्रजाति नहीं है, बल्कि साइंस के लिए एकदम नई प्रजाति है. यह बिल्ली आज से करीब 14 लाख साल पहले ही अपने बाकी रिश्तेदारों से अलग होकर एक नई प्रजाति बन चुकी थी.

वैज्ञानिकों ने तिलकायो नाम ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक, जिस शख्स को यह बिल्ली मिली थी, वो इसे तिलकायो कहकर बुलाते थे. स्पेनिश या स्थानीय क्वेशुआ भाषा में इस शब्द का कोई खास मतलब नहीं होता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसी नाम को बरकरार रखा है. इस इकलौती बिल्ली ने बिल्लियों के पूरे फैमिली ट्री को बदलकर रख दिया है. पहले वैज्ञानिक मानते थे कि पूरे इलाके में एक ही तरह की टाइगर कैट पाई जाती है, इसलिए उन्हें खतरे से बाहर माना जाता था. लेकिन अब पता चला है कि असल में ये एक नहीं, बल्कि पांच अलग-अलग प्रजातियां हैं.

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