रांची: झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को आज सुबह उत्तर प्रदेश एटीएस ने मुठभेड़ में मार गिराया। बृजेश पर कुल 30 लाख रुपए का इनाम घोषित था। वह करीब आठ वर्षों से एनआईए के टेरर फंडिंग मामले में वांटेड था। बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था।
अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र स्थित टेंगरा मोड़ के लंका मैदान में एटीएस की टीम ने बृजेश को घेर लिया। एटीएस के अनुसार, बृजेश बाइक से वहां पहुंचा। टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने कथित तौर पर पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान डीएसपी विपिन राय और हेड कॉन्स्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोली लगी। इसके बाद एटीएस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें बृजेश गंझू को गोली लगी और वह सड़क पर गिर गया। घायल अवस्था में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बृजेश गंझू ने 2004 में खड़ा किया था टीपीसी संगठन
बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। उस पर व्यापारियों, ट्रांसपोटर्रों और ठेकेदारों से कथित तौर पर वसूली करने के आरोप थे। झारखंड सरकार ने उस पर 25 लाख रुपए, जबकि एनआईए ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। करीब आठ वर्ष पहले एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले में बृजेश गंझू को वांटेड घोषित किया था। इसके बाद उसके घर की कुर्की की कार्रवाई भी की गई थी। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, बृजेश गंझू ने वर्ष 2004 में टीपीसी संगठन खड़ा किया था। इसके बाद संगठन ने झारखंड के चतरा, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, लातेहार और पलामू समेत बिहार के कुछ जिलों में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं। संगठन पर कई हिंसक घटनाओं को अंजाम देने और लोगों में भय पैदा करने के आरोप रहे हैं। बृजेश गंझू पर कारोबारियों, ट्रांसपोटर्रों और ठेकेदारों को कथित तौर पर डराने-धमकाने और उनसे लेवी वसूलने के भी आरोप थे। लंबे समय से फरार बृजेश की तलाश एनआईए समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को थी।



















