पूर्वी मिदनापुर : सभी राजनीतिक दल 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार में व्यस्त हैं, वहीं चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को एक कदम आगे बढ़ाते हुए एक नया कदम उठाया है. प्रशासन ने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर-घर जाकर मतदान अभियान शुरू कर दिया है.

सूची के आधार पर हो रहा मतदान

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार आवेदन करने वाले सभी बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं की सूची पहले से तैयार कर ली गई थी. मतदान अधिकारी नीलाद्री शेखर पांडा ने बताया कि उस सूची के अनुसार, आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए घर-घर जाकर मतदान कराया जा रहा है. शारीरिक बीमारी के कारण मतदान केंद्र तक न जा पाने वाले मतदाताओं ने आयोग की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है.

सुरक्षाकर्मियों ने इलाके में शुरू की गश्त

इस बीच, नंदीग्राम में स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बल पहले ही इलाके में पहुंच चुके हैं. किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने इलाके में गश्त शुरू कर दी है. प्रशासन सूत्रों के अनुसार, मतदान से ठीक दो दिन पहले इलाके में अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की जाएगी.

रायपुर,सूरजपुर जिले में सांठगांठ और फर्जीवाड़े का एक ऐसा सनसनखेज मामला प्रकाश में आया है, जहां प्रतिबंधित पहाड़, चट्टान कोल भंडार की करीबन 300 एकड़ से अधिक जमीन को राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मकारियों से सांठगांठ कर 14 लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम पंजीयन रिकार्ड में दर्ज करा लिया। इतना ही नहीं जिला प्रशासन ने कोल भंडार से संपन्न इस जमीन को बिना जांच पड़ताल के कोरबा स्थित आयरन उद्योग प्रकाश इंडस्ट्रीज को खनन के लिए लीज पर देने इन तथाकथित 14 भू-स्वामियों को इस इंडस्ट्रीज से करोड़ों का मुआवजा भी दिला दिया। सूचना के अधिकार के तहत मामला सामने आने के बाद इसमें जांच पड़ताल हुई और शिकायत भी सही पाई गई। इसके बाद सभी संबंधित विभाग में खलबली मच गई है।
शासकीय सूत्रों ने बताया कि पहाड़-चट्टान की जमीन को किसी भी सूरत में किसी के नाम से रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है और न ही इसे खनन के लिए लीज पर दिया जा सकता है। इसके बाद भी 300 एकड़ से ॉअधिक इस जमीन का पंजीयन 14 लोगों के नाम पर होना कई सवाल खड़े करता है। हाला कि इसमामले में जांच का काम पूरा कर लिया गया है और जांच में शिकायतों को सही पाया गया है। इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, वह भविष्य के गर्त में है। इस बीच जिन 14 लोगों के नाम पंजीयन में दर्ज है।
इनमें अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 के अनुसार, ग्राम केवरा में खाता क्रमांक 126 के तहत भू-स्वामी लक्ष्मण पिता भूखल (पनिका) के नाम खसरा नम्बर 1058/4 में 32.72 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 191 के तहत कबीर पिता इमामन (मुसलमान) के नाम खसरा नम्बर 1058/5 में 28.825 एकड़ भूमि; खाता क्रमांक 192 के तहत धर्मराज पिता जीधन (कोईर) के नाम खसरा नम्बर 1058/17 में 26.05 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 193 के तहत रामधनी पिता विशिष्ट धर दुबे (ब्राह्मण) के नाम खसरा नम्बर 1058/20 में 6.975 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 194 के तहत जुगेश्वर पिता लक्ष्मण (पनिका) के नाम खसरा नम्बर 1058/19 में 22.175 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 195 के तहत मोहरसाय पिता पूरन (पनिका) के नाम खसरा नम्बर 1058/18 में 36.250 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 196 के तहत जैबून पिता लाल मोहम्मद (मुसलमान) के नाम खसरा नम्बर 1058/21 में 3.825 एकड़ भूमि दर्ज है।
इसी प्रकार, ग्राम बस्करपारा में खाता क्रमांक 15 के तहत असगर पिता इमामन (मुसलमान) के नाम खसरा नम्बर 1/35 में 11.500 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 16 के तहत लक्ष्मण पिता भुपन (पनिका) के नाम खसरा नम्बर 1/42 में 15.436 एकड़ और खसरा नम्बर 1/43 में 15.436 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 12 के तहत धर्मराज पिता जीवधन के नाम खसरा नम्बर 1/53 में 11.200 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 21 के तहत जुगेश्वर पिता लक्ष्मण के नाम खसरा नम्बर 1/51 में 11.600 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 22 के तहत महावीर वल्द बिहारी के नाम खसरा नम्बर 1/52 में 10.125 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 24 के तहत तेजाराम वल्द तीलसाय के नाम खसरा नम्बर 346 में 23.67 एकड़ भूमि।
खाता क्रमांक 29 के तहत कालिका प्रताप सिंह पिता सूर्य प्रताप सिंह (क्षत्रिय) के नाम खसरा नम्बर 1/1 में 51.95 एकड़ भूमि दर्ज है।
इस जमीन फर्जीवाड़ा मामले में क्षेत्रिय सांसद चिंतामणी महराज द्वारा चाही गई जानकारी के संबंध में कलेक्टर सूरजपुर ने सांसद को लिखित में विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें यह स्वीकार किया गया है कि अधिकार अभिलेख में जोड़े गए अतिरिक्त पन्ने में सरल क्रमांक-44एवं मूल अधिकार अभिलेख में सरल क्रमांक-44दोहराया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अधिकार अभिलेख में एक पन्ने को अतिरिक्त जोड़कर अवैध प्रविष्टि कराया गया।

कलेक्टर द्वारा सासंद चिन्तामणि महाराज, को पत्र क्रमांक-69/नि.अ./2025 के तहत् ग्राम भास्करपारा, विकासखण्ड भैयाथान में स्थित प्रकाश इंडस्ट्रीज (खदान) के संबंध में बिन्दुवार जानकारी दी गई है, जिसमें संदर्भित आदेश के माध्यम से समिति का गठन करते हुए कार्यवाही कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।

मूल शिकायत/आवेदन की कंडिका-1 में उल्लेखित कुल 08 ग्राम पंचायतों की भूमि प्रकाश इंडस्ट्रीज (खदान) भास्करपारा के द्वारा अधिगृहीत की गई है एवं वर्तमान में भी की जा रही है, के संबंध में प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा अपने पत्र क्रमांक-पी.आई.एल. /भा.को.मां./जान/सं.स.(लो.स.)/2025-26/195, दिनांक-03.07.2025 के माध्यम से विभिन्न सहपत्रों सहित उपलब्ध करायी गई जानकारी एतद्द्वारा प्रदर्श पी-1 के रूप में पृष्ठ क्रमांक-1 से 94 तक संलग्न है।

कंडिका 02 में उल्लेखित एवं चाही गई जानकारी काफी विस्तृत है एवं समय-समय पर शासनादेश द्वारा किये गये आबंटन एवं व्यवस्थापन से संबंधित है तथा फील्ड में बेजा कब्जा की भूमि की भी जानकारी चाही गई है जो फील्ड एवं आबंटियों/भूमिस्वामियों से पूछताछ एवं सुनवाई का अवसर दिये जाने के उपरांत दी जा सकेगी फिर भी उक्त ग्राम पंचायतों की प्रभावित भूमि के संबंध में इस जांच प्रतिवेदन में आगे उल्लेख किया गया है।

आवेदन की कंडिका 03 में वर्णित यह कि शासकीय भूमि में काबिज एवं कितने दिनो तक व जो वर्तमान में काबिज हैं उनको भूमि पट्टा के लिए किस प्रकार से राहत प्रदान किया जा सकता है, के संबंध में यह कि वर्तमान में कब्जा के आधार पर किसी अतिक्रामक को पट्टा दिये जाने का कोई प्रावधान नहीं है।

आवेदन की कंडिका 04, 05 एवं 06 में वर्णित तथ्य के संबंध में यह कि प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा अपने पत्र क्रमांक-पी.आई.एल./भा.को.मां./जान/सं.स. (लो.स.)/2025-26/195, दिनांक-03.07.2025 में संलग्न सहपत्र में जानकारी प्रदान की गई है।

इसके अतिरिक्त प्रभावित 08 ग्राम पंचायत बड़सरा, बस्करपारा, कुर्रीडीह, खाड़ापारा, दनौलीखुर्द, केवरा, कुस्मुसी, कुदरीपारा (धरसेड़ी) में से ग्राम दनौलीखुर्द, खाड़ापारा, केवरा, बस्करपारा, बड़सरा, कुर्रीडीह के प्रभावित खसरों/भूमिस्वामियों का चालू अभिलेख, नवीन बंदोबस्त/री-सेटलमेंट के उपरांत निर्मित किये गये नगरीय तथा नगरेतर क्षेत्रों के लिए अधिकार अभिलेख वर्ष 1988 से 1996 जो जिला अभिलेख कोष्ठ सूरजपुर में उपलब्ध एवं तहसील कार्यालय के कानूनगो शाखा में उपलब्ध अभिलेख तथा अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 जो जिला अभिलेख कोष्ठ सूरजपुर में उपलब्ध एवं तहसील कार्यालय के कानूनगो शाखा में उपलब्ध अधिकार अभिलेख का मिलान करने के उपरांत निम्नलिखित वस्तुस्थिति पायी गई-

(क) ग्राम दनौलीखुर्द के खसरों की जांच की गई। जांच के दौरान तैयार की गई सूची प्रदर्श पी-2 है।

(ख) ग्राम खाड़ापारा के खसरों की जांच की गई। जांच के दौरान तैयार की गई सूची प्रदर्श पी-3 है।

(ग) ग्राम केवरा के खसरों की जांच की गई। जांच के दौरान तैयार की गई सूची प्रदर्श पी-4 है।

(घ) ग्राम बड़सरा के खसरों की जांच की गई। जांच के दौरान तैयार की गई सूची प्रदर्श पी-5 है।

(ङ) ग्राम कुर्रीडीह के खसरों की जांच की गई। जांच के दौरान तैयार की गई सूची प्रदर्श पी-6 है।

(च) ग्राम बस्करपारा के खसरों की जांच की गई। जांच के दौरान तैयार की गई सूची प्रदर्श पी-7 है।

प्रदर्श- पी-2 से पी-7 तक में उल्लेखित खसरों के संबंध में विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि यथा- ग्राम दनौलीखुर्द के खसरा 428/1, 428/2, 428/4, 428/5, 440/1, 440/2, 440/3 रकबा क्रमश: 5.09, 3.20, 2.00, 5.08, 5.08, 1.89, 5.08, 5.08 (हे.) जो मूल रूप से “पहाड़ चट्टान” मद् की भूमि है जो वर्तमान अभिलेख में क्रमश: अखिलेश प्रताप सिंह पिता अवधेश्वरी प्रताप सिंह, प्रभा देवी सिंह पिता अवधेश्वरी प्रताप सिंह, विधात्री देवी पति अखिलेश प्रताप सिंह, योगेश प्रताप सिंह, प्रभा देवी सिंह, संगीता सिंह, मुक्ता सिंह के नाम पर दर्ज है जो एक ही परिवार के सदस्य के नाम पर भूमिस्वामी हक में दर्ज पाया गया। उक्त खसरे का जिला अभिलेखागार सूरजपुर व हल्का पटवारी के पास उपलब्ध नवीन बंदोबस्त/री-सेटलमेंट के उपरांत निर्मित किये गये नगरीय तथा नगरेतर क्षेत्रों के लिए अधिकार अभिलेख वर्ष 1988 से 1996 में “पहाड़ चट्टान” मद् में ही दर्ज है परन्तु जिले में उपलब्ध अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 में पुराना खसरा नम्बर 566/709 रकबा 40.20 एकड़ शासकीय मद् में दर्ज है एवं उसी अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 में सरल क्रमांक-42 में लक्ष्मण वल्द भुवन, जाति पनिका सा. देह भूमिधारी के नाम पर खसरा नम्बर 566/709 रकबा 40.20 एकड़ भूमि दर्ज किया गया है। उक्त प्रविष्टि अधिकार अभिलेख में अतिरिक्त पृष्ठ (लेमिनेटेड) जोड़ा गया, जो प्रथम दृष्टया पन्ना अलग रंग व अलग लिखावट होना दृष्टिगत है। यहां विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अधिकार अभिलेख में जोड़े गये अतिरिक्त पन्ने में सरल क्रमांक-44 एवं मूल अधिकार अभिलेख के सरल क्रमांक-44 दोहराया गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि अधिकार अभिलेख में एक पन्ने को अतिरिक्त जोड़कर अवैध प्रविष्टि कराना पाया गया।

तहसील कार्यालय के कानूनगो शाखा में उपलब्ध ग्राम दनौलीखुर्द के अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 के सरल क्रमांक-06 में पुराना खसरा नम्बर 566/709 रकबा 40.20 एकड़ भूमि अवधेश्वरी प्रताप सिंह देव आ. इन्द्रप्रताप सिंह देव साकिन भैयाथान, भूमिस्वामी के नाम पर दर्ज है। उक्त अधिकार अभिलेख में जिस पन्ने पर संबंधित खातेदार अवधेश्वरी प्रताप सिंह देव का नाम दर्ज है, उस पन्ने में उल्लेखित मौजे का नाम “दनौलीखुर्द” के लिखावट में अधिकार अभिलेख के शेष लिखावट “दनौलीखुर्द” से भिन्नता परिलक्षित है तथा उक्त पन्ने के बाद के सभी सरल क्रमांक में ऊपरी लेखन किया गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि उक्त पन्ने को परिवर्तित कर दिया गया है।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट होता है कि पहाड-चट्टान मद् की भूमि को मनमाने तरीके से जिला अभिलेखागार एवं तहसील अभिलेखागर में उपलब्ध अभिलेखों में शासकीय कर्मचारियों के साथ अवैध साढ़-गांठ करते हुए मनमानी पूर्ण तरीके से असम्यक् प्रविष्टि करा ली गई जो उच्च स्तरीय जांच योग्य है। इसके अतिरिक्त संबंधितों के विरूद्ध भी जिम्मेदारी तय किया जाना भी उचित प्रतीत होता है। उक्त असम्यक प्रविष्टि से लाभान्वित होने वाले वर्तमान भूमिस्वामियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराया जाना उचित प्रतीत होता है। यहां ध्यातव्य यह है कि उक्त असम्यक प्रविष्टि के आधार पर किसी भी राजस्व अधिकारी द्वारा वर्तमान भूमिस्वामियों के पक्ष में त्रुटि सुधार के माध्यम से पहाड-चट्टान मद् की भूमि को खाते में परिवर्तित किया जाना भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए और अभिलेखागार के शासकीय कर्मचारी, वर्तमान भूमिस्वामी एवं संबंधित राजस्व अधिकारी के नैक्सस का भी गहन पड़ताल किया जाकर जिम्मेवारी तय करते हुए कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए।

यहां विशेष रूप से उल्लेखनीय यह भी है कि ऐसी असम्यक एवं अवैध प्रविष्टि के आधार पर वर्तमान भूमिस्वामियों के नाम से भूमि अधिग्रहण करके मुआवजा वितरित किया जाना भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए। ऐसी ही असम्यक एवं विसंगतिपूर्ण प्रविष्टि पी-2 से पी-7 में उल्लेखित गैर खाते की भूमि अर्थात् छोटे झाड़ जंगल मद् की भूमि को भी नगरीय तथा नगरेतर क्षेत्रों के लिए अधिकार अभिलेख वर्ष 1988 से 1996 के उपरांत तैयार किये गये राजस्व अभिलेखों में विशेषकर ग्राम केवरा के जिला अभिलेखागर व पटवारी के पास उपलब्ध अभिलेख में अवैध एवं असम्यक प्रविष्टि की जाकर बाद के वर्षों में खातेदारों के नाम पर खसरा कायम किया गया है, जिसके लिए अभिलेखागर के कर्मचारियों एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों, जिनके द्वारा ऐसी प्रविष्टि के आधार पर त्रुटि सुधार का अवलंब लेकर खाता कायम करके अवैध रूप से मुआवजा दिलाया जाना भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए।

इसी क्रम में जिला अभिलेखागार में उपलब्ध अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 एवं तहसील कार्यालय के कानूनगो शाखा में उपलब्ध अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 की जांच करते समय पाया गया कि अधिग्रहित क्षेत्रों से बाहर की भूमि जो शासकीय मद् में दर्ज थी, को कूटरचना करते हुए अधिकार अभिलेख में खाते में दर्ज किया गया हैं।

जिला अभिलेखागार में उपलब्ध अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 में किये गये उपरोक्त संदिग्ध व अवैध प्रविष्टियों के आधार पर आवेदक अनिल कुमार कुशवाहा आ. स्व. धर्मराज, निवासी ग्राम कुसमुसी, तहसील भैयाथान, जिला-सूरजपुर (छ.ग.) व अन्य 03 के द्वारा न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (रा.) भैयाथान के समक्ष आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 115, 116 छ.ग. भू-राजस्व संहिता बंदोबस्त त्रुटि सुधार बावत् आवेदन पेश किया गया है, जिस पर अनुविभागीय अधिकारी (रा.) भैयाथान के द्वारा रा.प्र.क्र. 202506260400114/अ-6अ/2024-25, पक्षकार अनिल कुमार कुशवाहा वगैरह प्रति छ.ग. शासन, ग्राम केवरा प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। इसी प्रकार प्रियम कुमार दास आ. मनोज, निवासी ग्राम केवरा, तहसील भैयाथान, जिला-सूरजपुर (छ.ग.) व अन्य 01 के द्वारा आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 115, 116 छ.ग. भू-राजस्व संहिता बंदोबस्त त्रुटि सुधार बावत् आवेदन अनुविभागीय अधिकारी (रा.) भैयाथान के समक्ष पेश किया गया, जिसमें रा.प्र.क्र. 202507260400032/अ-6अ, पक्षकार प्रियम कुमार दास व अन्य 01 प्रति छ.ग. शासन, साकिन केवरा पंजीबद्ध किया गया है जो वर्तमान में लंबित है। इससे भी प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि इन व्यक्तियों द्वारा रिकॉर्ड रूम में कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाकर एवं उसकी नकल प्राप्त करके अवैध गांठ-गांठ करते हुए वर्तमान राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने की मंशा से प्रेरित होकर बेजा लाभ लिये जाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। इन लोगों के हृद्ग&ह्वह्य की भी पड़ताल करके दण्डात्मक कार्यवाही किया जाना उचित होगा।

प्रदर्श पी-2 से पी-7 में अंकित सूची में दर्शाये गये खातेदारों के द्वारा नवीन बंदोबस्त पश्चात् राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराया गया है जो प्रथम दृष्टया संदिग्ध एवं कूटरचित साथ ही साथ मुआवजा हेतु अपात्र भूमिधारी प्रतीत होता है क्योंकि उपरोक्त भूमि मूल रूप से “पहाड़ चट्टान” एवं “छोटे झाड़ जंगल मद्” की भूमि है, जिसका नवीन बंदोबस्त वर्ष 1988 से 1996 तक के अवधि में तैयार किये गये नगरीय तथा नगरेतर क्षेत्रों के लिए अधिकार अभिलेख के बाद की अवधि के उपरांत ऐसे दोनों मद अर्थात् “पहाड़ चट्टान” एवं “छोटे झाड़ जंगल मद” की भूमि का आबंटन या व्यवस्थापन संबंधी कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है। प्रदर्श पी-2 से पी-7 में दर्शाये गये सूची के अनुसार उक्त मद की गैर खाता की भूमि को 3 एकड़ से 52 एकड़ तक खसरा कायम करते हुए विभिन्न व्यक्तियों के नाम से दर्ज किया गया है जो राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 4 क्रमांक-3 के प्रावधान के विपरीत प्रतीत होता है। अत: शासकीय भू-अभिलेखों में कूटरचित एवं असम्यक, अवैध प्रविष्टि के आधार पर बोगस भूमिस्वामी बनकर मुआवजा हड़पने जैसा कृत्य किया गया है और आगे करने की मंशा से प्रेरित प्रतीत होता है। अत: संबंधितों के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच किया जाकर प्राथमिक दर्ज कराया जाना भी उचित प्रतीत होता है।

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