अंबिकापुर। सूरजपुर थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग पुत्री की नृशंस हत्या की घटना में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायाधीश आनंद प्रकाश वरियाल की अदालत ने मुख्य दोषी आदतन अपराधी कुलदीप साहू (29), चंद्रकांत उर्फ सीके चौधरी (34) और रिंकू सिंह (32)को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि चौथे दोषी आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा दी गई है। इस मामले में दो आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में पहले ही दोषमुक्त किया गया है।
पुलिस व अभियोजन के अनुसार घटना 13 अक्टूबर 2024 की रात की है। आदतन अपराधी कुलदीप साहू का हेड कॉन्स्टेबल तालिब शेख से पुराना विवाद था। इसी रंजिश में उसने उस रात शहर में आतंक मचाया था।पहले उसने बस स्टैंड के समीप एक पुलिसकर्मी पर खौलता हुआ तेल उड़ेल दिया था, जब पुलिसकर्मी उसे पकड़ने पहुंचे तो उसने चार पहिया वाहन से कुचलने का प्रयास किया। इसके बाद वह अपने तीन साथियों के साथ सूरजपुर में हेड कॉन्स्टेबल तालिब शेख के किराए के मकान में घुस गया।घर में घुसकर आरोपितों ने हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी के साथ दुष्कर्म किया और फिर बड़ी बेरहमी से चाकू व कैंची से हमला कर दोनों की हत्या कर दी।
पीएम रिपोर्ट में सामने आई थी नृशंषता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेड कॉन्स्टेबल की पत्नी पर 37 बार और नाबालिग बेटी पर 28 बार धारदार हथियार से वार के निशान मिले थे। महिला के गंभीर रूप से घायल होने के बाद तीन दोषियों ने उसके साथ हैवानियत की थी। वारदात के समय हेड कॉन्स्टेबल घर पर नहीं थे। हत्या के बाद दोनों के शव को घटनस्थल से दूर पीढ़ा गांव में फेंक दिया था।
पूरे जिले में फैला था आक्रोश
दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे सूरजपुर में आक्रोश फैल गया था। लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी हटा दिया गया था। आइपीएस प्रशांत सिंह ठाकुर को कठिन समय में सूरजपुर का पुलिस अधीक्षक बनाकर भेजा गया था। उन्हीं के दिशा निर्देश पर जांच हुई और साक्ष्य संकलित हुए।
कुलदीप पर पहले से दर्ज थे दो दर्जन प्रकरण
दोषी कुलदीप साहू के विरुद्ध इस घटना से पहले भी दो दर्जन से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज थे।उसी दौरान उसे फांसी की सजा देने की मांग कर लोग सड़क पर उतर गए थे। उसके अवैध निर्माण को जमींदोज किया गया था।इसी प्रकरण से जुड़े पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाकर कुचलने के प्रयास के मामले में अदालत ने कुलदीप साहू को 28 सितंबर 2026 को ही 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनने के बाद अदालत से बाहर निकलते समय भी वह हंस रहा था, जिसका वीडियो प्रसारित हुआ था।
विरल से विरलतम मानते हुए फांसी
अभियोजन पक्ष ने इस मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का बताया था। अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या अत्यंत क्रूरता और सुनियोजित तरीके से की गई। इसीलिए तीन आरोपितों को मृत्युदंड और एक को मृत्यु पर्यंत कारावास दिया जाता है। आठ अक्टूबर की तारीख फैसले के लिए नियत की गई थी, जिस पर गुरुवार को फैसला सुनाया गया।
राज्य गठन के बाद सूरजपुर में पहली फांसी
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद सूरजपुर न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने का यह पहला प्रकरण है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय में हत्या के एक मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। वहीं सरगुजा संभाग में एक ही अपराध में तीन लोगों को एक साथ फांसी की सजा सुनाए जाने का भी यह पहला मामला है।



















