100 साल बाद शारदीय नवरात्र 2026 में विशेष ग्रहों का संयोग बन रहा है. गजकेसरी राजयोग का लाभ पाने के लिए जानें क्या करें.
Navratri Durlabh Sanyog: शारदीय नवरात्र 2026 का आरंभ 11 अक्टूबर 2026 से होगा. इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को नवरात्र की महानवमी के साथ होगा. पंचांग के अनुसार, नवरात्र आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होती है और नवमी के दिन समाप्त होती है. 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा. साल 2026 में शारदीय नवरात्र के दौरान एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं. नवरात्र में देवी के नौ शक्ति रूपों की पूजा की जाती है. आइए, ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से जानते हैं इस बार नवरात्र में ग्रह-नक्षत्रों से कौन-कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं. साथ ही गजकेसरी राजयोग क्यों खास है.
नवरात्र पर कैसी रहेगी ग्रहों की स्थिति?
शारदीय नवरात्र 2026 में ग्रहों की स्थिति बेहद खास है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि 100 साल बाद नवरात्र में एकसाथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं. ग्रहों के राजा सूर्य 17 अक्टूबर तक कन्या राशि में रहेंगे. इसके बाद तुला राशि में प्रवेश करेंगे.
जबकि चद्र ग्रह कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु और मकर राशि में संचरण करेंगे. इसके अलावा मंगल देव कर्क राशि में संचरण करेंगे. बुध तुला राशि में रहेंगे. देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में मौजूद रहेंगे. शुक्र तुला राशि में रहेंगे. शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में संचरण करते रहेंगे. राहु, कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में रहेंगे.
कैसे बनता है गजकेसरी राजयोग?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गजकेसरी योग बेहद लाभकारी राजयोग है. जब चंद्रमा और गुरु की खास स्थिति बनती है, तो इस राजयोग का निर्माण होता है. जैसे- गुरु और चंद्रमा किसी एक राशि में एकसाथ बैठे हों या गुरु के केंद्र यानी चौथे, सातवें और दसवें भाव में होने पर चंद्रमा की दृष्टि पड़े या गुरु की दृष्टि चंद्रमा के ऊपर बन रही हो, तो इस स्थिति को गजकेसरी योग कहा जाता है. गजकेसरी राजयोग 17 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक रहेगा.
क्यों खास है गजकेसरी राजयोग?
गजकेसरी राजयोग में किए कार्यों के लाभ कई गुना अधिक मिलता है. इस राजयोग में पद-प्रतिष्ठा, व्यापार में उन्नति, भूमि-भवन का लाभ, बौद्धिक क्षमता में वृद्धि और धन में बढ़ोतरी होती है.
नवरात्र में कब है महा अष्टमी और नवमी?
मिथिला और महावीर पंचांग अनुसार, इस साल शारदीय नवरात्र की महा अष्टमी 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी. महा अष्टमी के दिन देवी दुर्गा महागौरी स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. कई भक्त इस दिन विशेष रूप से व्रत रखते हैं.



















