प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के मंच से भारत की आर्थिक भूमिका और वैश्विक भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने भारत को केवल निवेश के लिए आकर्षक देश नहीं, बल्कि दुनिया की आर्थिक दिशा तय करने में सक्षम भरोसेमंद भागीदार के रूप में पेश किया। नई दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक बदलाव, शक्ति संतुलन और विकास के नए अवसरों पर चर्चा हो रही है। ऐसे में भारत की मेजबानी को खास महत्व दिया जा रहा है।
संकटों के बीच भारत की अलग विकास रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का मौजूदा दशक दुनिया के सामने असाधारण चुनौतियां लेकर आया है। पिछले छह वर्षों में कोरोना महामारी, विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध और व्यापार में व्यवधानों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा की आपूर्ति में आई बाधाओं ने देशों को अपनी रणनीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत इन परिस्थितियों में शक्ति प्रदर्शन की होड़ के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें विकास के अवसर अधिक लोगों तक पहुंचें और देश की क्षमताओं से दूसरे राष्ट्र भी लाभ उठा सकें।
निवेश से आगे बढ़कर वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत इस समय अपने विकास सफर के निर्णायक दौर से गुजर रहा है। देश अब केवल विदेशी निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक भविष्य को आकार देने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उनके मुताबिक, विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ऐसी आर्थिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जो दुनिया के लिए भरोसेमंद विकास का आधार बन सके।
प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया के सबसे विश्वसनीय आर्थिक विकास केंद्रों में शामिल करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में संतुलन स्थापित करने की प्रतिबद्धता भी जताई। उनका संदेश ऐसे समय में आया है, जब देशों के बीच व्यापार, तकनीक, निवेश और आर्थिक सुरक्षा को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य में समय से पहले उपलब्धि
जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों पर बोलते हुए मोदी ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में भारत ने 2030 तक स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य रखा था। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश ने नवंबर 2021 में ही यह लक्ष्य पूरा कर लिया।
यह उपलब्धि भारत में सौर और पवन ऊर्जा सहित गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के महत्व को सामने लाती है। हालांकि, स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ बिजली भंडारण, ग्रिड क्षमता और विश्वसनीय आपूर्ति जैसी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
डिजिटल इंडिया का अनुभव दुनिया के लिए उपयोगी
प्रधानमंत्री ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने बताया कि भारत अपने डिजिटल सिस्टम से जुड़े अनुभव दूसरे देशों के साथ साझा कर रहा है, ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीकी व्यवस्था तैयार कर सकें।
कोरोना महामारी के दौरान विकसित CoWIN प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने इसकी ओपन-सोर्स प्रकृति का उल्लेख किया। इस तरह की पहल डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने और स्वास्थ्य संबंधी अभियानों के संचालन में तकनीक की भूमिका को रेखांकित करती है।
वैक्सीन से एआई तक, वैश्विक सहयोग का संदेश
मोदी ने बताया कि भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 के टीके उपलब्ध कराए और अपनी विनिर्माण क्षमता के जरिए अन्य देशों की सहायता की। उन्होंने भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल केवल मनुष्यों के हित में ही नहीं, बल्कि पशुओं के कल्याण के लिए भी किया जा सकता है।
यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब एआई के इस्तेमाल, डेटा सुरक्षा, रोजगार और तकनीकी पहुंच को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि नवाचार का लाभ व्यापक आबादी तक पहुंचे और तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी के साथ हो।
‘A World in Play’ थीम पर हो रहा अंतरराष्ट्रीय मंथन
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के 2026 संस्करण की थीम ‘A World in Play: Defining the New Levers of Power’ रखी गई है। इसका व्यापक अर्थ बदलती दुनिया में प्रभाव, आर्थिक शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता के नए आधारों को समझना है।
नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को होना निर्धारित है। इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, कारोबारी जगत की प्रमुख हस्तियां और नीति-निर्माता बदलती वैश्विक परिस्थितियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी इस आयोजन में संबोधन देने वाले प्रमुख वक्ताओं में शामिल हैं। कतर के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री शेख फैसल बिन थानी बिन फैसल अल थानी की भागीदारी भी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करती है।



















