सऊदी अरब की राजधानी रियाद में फिर धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि उसने हूती विद्रोहियों की बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया। इससे पहले भी हवाई अड्डों और तेल ठिकानों पर हमले हो चुके हैं। मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में सऊदी अरब को मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे में क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हूतियों के खिलाफ युद्ध में उतरेंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बुधवार को एक बार फिर धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि उसने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से रियाद पर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया। फिलहाल इस घटना में किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की तत्काल सूचना नहीं है। इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ रहा है कि क्या अमेरिका सऊदी अरब के समर्थन में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेगा।
रियाद में धमाकों के पीछे कौन है और निशाने पर क्या है?
रियाद के निवासियों ने बुधवार को नए धमाकों की आवाजें सुनने की जानकारी दी। सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपनी पहचान उजागर नहीं की। सऊदी अरब के सैन्य गठबंधन ने कहा कि हूतियों ने राजधानी की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे हवा में ही रोक दिया गया। हालांकि, हूती विद्रोहियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने रियाद और राजधानी के दक्षिण-पूर्व में स्थित खरज प्रांत में हवाई हमले के अलर्ट जारी किए। खरज में सैन्य उद्योग निगम और प्रिंस सुल्तान एयर बेस स्थित हैं। इससे पहले भी हूती विद्रोही हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना चुके हैं।
क्या रियाद के हवाई अड्डे और तेल ठिकाने भी खतरे में हैं?
हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बीते एक सप्ताह में कई बार निशाना बनाया गया। इन हमलों में 17 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। हूती विद्रोही हवाई अड्डों और तेल ठिकानों पर हमलों की पहले से चेतावनी भी दे रहे हैं। इसके कारण कई विमानन कंपनियां उड़ानें रोक रही हैं और अपने विमानों को वहां से हटा रही हैं। मंगलवार को सऊदी अरामको की एक सुविधा के प्रशासनिक भवन में आग लग गई। अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल है। इन घटनाओं से दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
क्या सऊदी अरब हूतियों की सभी मिसाइलें रोक सकता है?
सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने की है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने वाला सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर की कमी का सामना कर रहा है। देश का क्षेत्रफल टेक्सास राज्य से करीब तीन गुना है। ऐसे में इतने बड़े इलाके में रोज होने वाले हमलों को पूरी तरह रोकना बेहद मुश्किल है। हूतियों के पास ऐसे हथियार हैं, जो 1,600 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला कर सकते हैं। कुछ मिसाइलों के वारहेड उड़ान के दौरान दिशा भी बदल सकते हैं। हाल ही में रोकी गई दो मिसाइलों का मलबा रियाद के रिहायशी इलाकों में गिरा था। इससे चार लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। मलबे से 15 घरों को नुकसान पहुंचा। इस स्थिति में अमेरिका से अतिरिक्त सैन्य मदद की मांग भी अहम हो गई है।
यमन में सऊदी अरब के हमलों से क्यों बढ़ रहा संघर्ष?
- सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष अब और तेज हो गया है। सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों पर हवाई हमले कर रहा है। इस साल संघर्ष तब भड़का, जब हूतियों ने विद्रोहियों के नियंत्रण वाले सना हवाई अड्डे पर हुए हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी नाकेबंदी घोषित कर दी। करीब डेढ़ सप्ताह पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया।
- हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को दावा किया कि मंगलवार को होदेदा प्रांत के रास ईसा बंदरगाह क्षेत्र में हवाई हमले में दो लोगों की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए। मंत्रालय के अनुसार, हमला सरकारी तेल कंपनी की एक सुविधा पर हुआ। उसने इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। गठबंधन ने सना में भी एक तेल सुविधा पर हमला किया।



















