जयपुर: पिंकसिटी के पॉश इलाके वैशाली नगर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां शातिर साइबर अपराधियों ने 74 वर्षीय एक असहाय बुजुर्ग को कानूनी कार्रवाई का ऐसा खौफ दिखाया कि वे 10 दिनों तक अपने ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ रहे। ठगों ने गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने की धमकी देकर बुजुर्ग के बैंक खाते से 1.74 करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई पार कर दी। मंगलवार को पीड़ित के पुलिस स्टेशन पहुँचने के बाद इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा हुआ।
स्क्रीन पर ‘सुप्रीम कोर्ट’ और ‘IPS अफसर’: ऐसे रचा खौफ का जाल
जानकारी के मुताबिक, वैशाली नगर निवासी पीड़ित बुजुर्ग अपनी पत्नी के साथ जयपुर में अकेले रहते हैं। उनका बेटा विदेश में और बेटी राजस्थान से बाहर रहती है। इसी बात का फायदा उठाकर शातिर ठगों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का बड़ा अधिकारी बताकर बुजुर्ग को कॉल किया।
ठगों ने दावा किया कि उनके बैंक खाते से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुए हैं और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का केस दर्ज हो चुका है। बुजुर्ग को झांसे में लेने के लिए अपराधियों ने हाई-टेक वीडियो कॉल का सहारा लिया। एक कॉलर ने अपने स्क्रीन पर ‘सुप्रीम कोर्ट’ का फर्जी बैकग्राउंड दिखाया, तो दूसरे ठग ने खुद को वरिष्ठ IPS अफसर बताकर खाकी का रौब झाड़ा।
10 दिनों तक कमरे में कैद, किसी से बात करने पर भी पाबंदी!
ठगों का खौफ इस कदर हावी हुआ कि बुजुर्ग 10 दिनों तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकल सके। आरोपियों ने उन्हें चौबीसों घंटे वीडियो कॉल की निगरानी में रखा और साफ चेतावनी दी कि अगर उन्होंने किसी रिश्तेदार या पड़ोसी से बात की, तो उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। डर और मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग ने ठगों के बताए अलग-अलग फर्जी खातों में कई बार में कुल 1.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बेटे-बेटी दूर थे, परिचित की मदद से पहुँचे थाने
जब लगातार पैसे ट्रांसफर करने के बाद ठगों की मांगें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं, तब बुजुर्ग को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने एक नजदीकी परिचित से आपबीती साझा की। इसके बाद परिजनों की सलाह पर पीड़ित तुरंत वैशाली नगर थाने पहुंचे।
वैशाली नगर थानाधिकारी (SHO) अरविंद सिंह शेखावत ने बताया, “मंगलवार को मामले में प्राथमिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पीड़ित बुजुर्ग दंपत्ति घर पर अकेले थे, जिसका अपराधियों ने फायदा उठाया।”
मनी ट्रेल और फर्जी IPS खातों की पड़ताल में जुटी पुलिस
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम यूनिट और जयपुर पुलिस एक्टिव मोड में आ गई है। पुलिस की विशेष टीमें उन मोबाइल नंबरों, वीडियो कॉल आईपी एड्रेस और बैंक खातों की जांच कर रही हैं जिनमें 1.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। संबंधित बैंकों से भी तत्काल पत्राचार कर पैसों की ‘मनी ट्रेल’ खंगाली जा रही है ताकि ठगों के सिंडिकेट तक पहुँचा जा सके।



















