भोपाल। मध्यप्रदेश में मार्च 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के पतन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। करीब छह साल पुराने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सरकार गिरने के पीछे रहे राजनीतिक घटनाक्रम और पार्टी के अंदरूनी हालात पर सवाल उठाए हैं। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। उनके बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में पुराने विवाद फिर सुर्खियों में आ गए हैं।

कमलनाथ सरकार के पतन पर फिर क्यों उठे सवाल?

मध्यप्रदेश में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर सरकार बनाई थी। कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन पार्टी के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेदों की चर्चाएं लगातार सामने आती रहीं। मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफों के बाद सरकार अल्पमत में आ गई। अंततः कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया।

अब सज्जन सिंह वर्मा के बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस सरकार के सत्ता से बाहर होने के कारणों पर नेताओं के अलग-अलग नजरिए सामने आने से पार्टी के भीतर उस समय बने राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस तेज हो गई है।

दिग्विजय सिंह ने सिंधिया की नाराजगी को लेकर क्या कहा था?

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक साक्षात्कार में कमलनाथ सरकार के पतन और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने से जुड़े घटनाक्रम पर अपनी बात रखी थी। उनके अनुसार, 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद सिंधिया मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया।

दिग्विजय सिंह के बयान के मुताबिक, इसके बाद सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का विकल्प भी दिया गया था। हालांकि, यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। बताया गया कि सिंधिया प्रदेश संगठन में अपने करीबी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाना चाहते थे। इनमें तुलसी सिलावट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और गोविंद सिंह राजपूत को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग का भी जिक्र किया गया।

नेतृत्व और संगठन को लेकर बढ़ती गई खींचतान

कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और सत्ता में भागीदारी को लेकर नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाएं सामने आती रहीं। कमलनाथ और सिंधिया के बीच बढ़ती दूरी को भी सरकार के राजनीतिक संकट से जोड़कर देखा गया। हालांकि, सरकार गिरने के पीछे केवल एक कारण को जिम्मेदार ठहराने के बजाय उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को समझना जरूरी है।

सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफों ने सरकार का बहुमत समाप्त कर दिया था। इस घटनाक्रम ने न केवल मध्यप्रदेश की राजनीति को बदल दिया, बल्कि कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व को लेकर भी कई सवाल खड़े किए।

कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति फिर चर्चा में

सज्जन सिंह वर्मा के ताजा बयान और दिग्विजय सिंह के पुराने साक्षात्कार के संदर्भ में अब एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि 2020 में कांग्रेस सरकार को बचाने के प्रयासों में कहां कमी रह गई थी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल कितना प्रभावी था। कमलनाथ सरकार के पतन को लेकर सामने आ रहे अलग-अलग बयानों से स्पष्ट है कि यह राजनीतिक घटनाक्रम कांग्रेस के लिए आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि सज्जन सिंह वर्मा के सवालों पर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता क्या प्रतिक्रिया देते हैं और इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस के भीतर सियासी बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031