तिरुवनंतपुरम : केरल वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक, 2026 को सोमवार को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और सुरक्षा के साथ-साथ एक ‘सिल्वर इकॉनमी’ (बुजुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) बनाना है, जिसमें बुजुर्ग राज्य की अर्थव्यवस्था में ‘रचनात्मक और सृजनात्मक’ रूप से योगदान दे सकें। विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सदस्यों द्वारा लगभग 1300 संशोधन पेश किए गए। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने विधानसभा में कहा कि दुनिया में यह पहली बार है जब कोई ऐसा कानून पारित किया गया है जो वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की गारंटी देता है।

वीडी सतीशन ने कहा कि केंद्रीय अधिनियम (माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007) या केरल के पहले पारित किए गए अधिनियम (केरल राज्य वरिष्ठ नागरिक आयोग अधिनियम, 2025) में ऐसी कोई गारंटी नहीं है।

विलिंग विल पर विधेयक में कही गई अलग बात

सदस्यों ने इस विधेयक को लेकर दो मुख्य चिंताएं जताईं। पहली यह कि विधेयक में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो केंद्रीय अधिनियम की कुछ धाराओं से मेल नहीं खाते। दूसरी यह कि विधेयक में ‘लिविंग विल’ तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई कुछ सावधानियों को शामिल नहीं किया गया है। विशेष रूप से दो स्वतंत्र गवाहों की अनिवार्य उपस्थिति की शर्त को।

‘लिविंग विल’ से जुड़ा पेच

‘लिविंग विल’ के मुद्दे को पूर्व मंत्रियों के. एन. बालगोपाल और के. राजन ने उठाया। उन्होंने कहा कि विधेयक में, ‘लिविंग विल’ की घोषणा ‘जिला-स्तरीय वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा मंच’ या ‘जिला-स्तरीय वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा इकाई’ के अध्यक्ष की उपस्थिति में की जा सकती है। इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किए गए दो स्वतंत्र गवाहों की आवश्यकता को शामिल नहीं किया गया है।

क्या होती है लिविंग विल?

‘लिविंग विल’ एक लिखित घोषणा है, जिसमें कोई वरिष्ठ नागरिक (चाहे वह घर पर हो या किसी वरिष्ठ नागरिक देखभाल केंद्र में) अपनी ‘जीवन के अंतिम चरण’ से जुड़ी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। इसमें वे चीजें शामिल हो सकती हैं जिन्हें वह नहीं चाहता, जैसे कि जीवन बढ़ाने वाली सर्जरी, IV फ्लूइड, कीमोथेरेपी, ऑक्सीजन, इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती होना, शरीर में ट्यूब डालना या अन्य चिकित्सा सहायता।

‘कॉमन कॉज बनाम भारत संघ’ मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘लिविंग विल’ पर दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में हस्ताक्षर होने चाहिए और इसके बाद जिला न्यायाधीश द्वारा नियुक्त प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) द्वारा भी इस पर प्रति-हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। सदस्यों को लगा कि स्वतंत्र गवाहों के न होने पर, ‘लिविंग विल’ को लागू करने की प्रक्रिया का गलत फायदा उठाया जा सकता है।

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031