साय सरकार ने 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाया, लेकिन कांग्रेस शासन में कर्मचारियों-पेंशनरों के साथ हुए अन्याय पर भी बोलें पूर्व विधायक
2019 में देय तिथि के बजाय आदेश जारी होने की तिथि से लाभ देने की परंपरा शुरू हुई, जिसका खामियाजा आज भी भुगत रहे कर्मचारी और पेंशनर
रायपुर। रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय द्वारा छत्तीसगढ़ की साय सरकार की ओर से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने के निर्णय को आधा-अधूरा न्याय बताने पर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि विकास उपाध्याय को कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की बात करने से पहले कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के पांच साल के कार्यकाल का भी स्मरण करना चाहिए। उस दौरान कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत नहीं मिली और बड़ी मात्रा में एरियर का भुगतान लंबित रहा।
नामदेव ने कहा कि महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के भुगतान में देरी तथा एरियर से वंचित रखने की समस्या की शुरुआत वर्ष 2019 में भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुई थी। केंद्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ते की किस्तों की घोषणा किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने आदेश जारी करने में विलंब किया और कई मामलों में लाभ देय तिथि के बजाय आदेश जारी होने की तिथि से दिया। इससे कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके वास्तविक अधिकार का लाभ समय पर नहीं मिल पाया।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 से दिसंबर 2023 तक के कांग्रेस शासनकाल में महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत की विभिन्न किस्तों के भुगतान में लगातार विलंब हुआ। महासंघ के आकलन के अनुसार, इस अवधि में लगभग 34 से 40 माह तक के एरियर का बकाया बना, जिसका पूरा भुगतान आज तक नहीं हो पाया है। यही विलंबित भुगतान की परंपरा आगे भी जारी रही और अब विभिन्न लंबित किस्तों को मिलाकर कुल बकाये का आंकड़ा लगभग 99 माह तक पहुंचने की स्थिति बताई जा रही है।
नामदेव ने स्पष्ट किया कि भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ वर्तमान साय सरकार द्वारा घोषित 2 प्रतिशत महंगाई राहत को पर्याप्त नहीं मानता। महासंघ की मांग है कि केंद्र सरकार के अनुरूप जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत तथा जुलाई 2026 से देय 3 प्रतिशत की वृद्धि मिलाकर कुल 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत, वर्तमान दर 63 प्रतिशत करते हुए, संपूर्ण एरियर सहित तत्काल स्वीकृत और भुगतान किया जाए।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों का प्रश्न किसी दल विशेष की राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए। यदि विकास उपाध्याय वास्तव में कर्मचारियों और पेंशनरों के हितैषी हैं, तो उन्हें कांग्रेस शासनकाल में लंबित रखे गए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के एरियर पर भी अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए। केवल वर्तमान सरकार के निर्णय की आलोचना करने से पूर्ववर्ती सरकार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।
नामदेव ने कहा कि पेंशनरों को न कांग्रेस शासनकाल में उनका पूरा हक मिला और न ही वर्तमान में उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप भुगतान हो रहा है। महासंघ की लड़ाई किसी सरकार या राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका वैधानिक आर्थिक अधिकार दिलाने के लिए है। सरकार चाहे किसी भी दल की हो, उसे महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत केंद्र के समान देय तिथि से एरियर सहित देना चाहिए।



















