रायपुर। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने बताया कि राज्य सरकार ने पाठ्यक्रम में 30 से 40 प्रतिशत कमी किया गया है और यह निर्णय लिया है कि बच्चों को 80 प्रतिशत अंक प्रोजेक्ट से और 20 प्रतिशत अंक ऑनलाईन परीक्षा के माध्यम से दिया जाएगा, तो फिर 20 प्रतिशत अंक के लिए बच्चों का ऑफलाईन परीक्षा लिया जाना समझ से परे है, क्योंकि प्रोजेक्ट से बच्चों को 80 प्रतिशत अंक दिया जाना है। यदि 20 प्रतिशत अंक के लिए बच्चों से परीक्षा लिया ही जाना है, तो उसे ऑनलाईन भी लिया जा सकता है, लेकिन 20 प्रतिशत अंक के लिए बच्चों के जीवन व भविष्य को स्कूल में बुलाकर परीक्षा संपन्न कराया जाकर जोखिम में डालना उचित नहीं है। वैसे भी बच्चे पूरा साल ऑनलाईन क्लासेस के माध्यम से पढ़ाई किये है, तो ऑनलाईन के माध्यम से परीक्षा भी संपन्न किया जा सकता है। श्री पॉल का कहना है कि पूरे प्रदेश में सरकारी शिक्षकों का आरटीपीसीआर कोरोना टेस्ट हो रहा है और उन्हें स्वास्थ्य विभाग के द्वारा टेस्ट के पश्चात् सेल्फ आईसोलेशन रहने के लिए निर्देशित किया जा रहा है, लेकिन शिक्षक प्रतिदिन स्कूल जा रहे है और बच्चों से प्रायोगिक परीक्षा ले रहे है और पढ़ाई करा रहे है। श्री पॉल का कहना है कि सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। खासकर बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार के पास कोई योजना नहीं है और सरकार जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है फिर भी सरकार बच्चों को प्रयोग के रूप मे उपयोग कर रही है कि जहां कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयेगा, वहां स्कूल बंद कर देंगे, यानी सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है, सरकार सिर्फ प्रयोग कर रही है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने स्कूल शिक्षा विभाग, डीपीआई, सीजी बोर्ड से बच्चों से ऑनलाईन परीक्षा संपन्न कराने के विषय में गंभीरता से विचार करने की मांग किया है।

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