राजनांदगांव। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में ष्जीवन कौशल और आत्महत्या की रोकथाम विषय पर केंद्रित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला विशेषकर सोशल वर्कर, सायकेट्रिक नर्स और कम्युनिटी मोबिलाइजर को प्रशिक्षण देने के लिए है। प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले दिन आत्महत्या करने से पूर्व मन:मस्तिष्क में उपजने वाले नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कम्युनिटी मेंटल हेल्थ टेली मेंटरिंग प्रोग्राम (चैम्प) के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साईंस (निमहांस), बैंगलोर के डॉ. मलाथेस शामिल हुए। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी की उपस्थिति में प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। मनोरोग पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले दिन आत्महत्या की रोकथाम पर जोर देते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। आत्महत्या करने से पूर्व मस्तिष्क में उपजने वाले नकारात्मक विचारों के लक्षण तथा इस पर नियंत्रण के उपाय बताए गए। इस अवसर पर डॉ. मलाथेस ने कहा, प्रशिक्षण कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य कौशल विकास है। किसी मनोरोगी को नकारात्मक विचारों से हटाकर सकारात्मक विचारों के प्रति प्रेरित करना अपने आप में किसी महत्वपूर्ण कौशल से कम नहीं है। प्रशिक्षण के बाद इसी क्रम को प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है तथा प्रशिक्षण में मिली जानकारी को हुनर के रूप में इस्तेमाल करना है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा, यह प्रशिक्षण अपने आप में एक नई पहल है जिसमें गतिविधि आधारित होने के साथ.साथ खेल-खेल के माध्यम से प्रतिभागियों को मानसिक बीमारियों के बारे में बताया जा रहा है। मनोविकार से पीडि़तों की उपचार संबंधी सहायता के लिए ही जिले में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सबसे पहले जीवन कौशल के विषय को गहराई से समझना होगा। उन्होंने बताया, अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 तक जिले में 771 नए मानसिक रोगी मिले, जिसमें सबसे अधिक 101 केस साइकोसिस के मिले हैं। वहीं इस अवधि में 59 नए मानसिक रोगियों को मानसिक रोग चिकित्सालय में भर्ती कर उनका इलाज किया गया है। उन्होंने बताया, मानसिक रोग के लक्षणों को यदि समय पर पहचान लिया जाए तो उचित इलाज के जरिए इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला सलाहकार विकास राठौर ने कहा, प्रशिक्षण का उद्देश्य नए साथियों को जीवन कौशल के साथ-साथ आत्महत्या की रोकथाम का प्रयास करते हुए आत्महत्या के पूर्व किए जाने वाले संकेतों को पहचानना और जीवन कौशल के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मानसिक रोग छुआछूत से नहीं फैलता। यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, यहां तक कि बच्चे भी इससे अछूते नहीं है, जो चिंतन का विषय है। साथ ही उन्होंने अपील की कि समाज के सभी वर्गों के लोग जुड़कर आत्महत्या करने वाले नागरिकों की रोकथाम के लिए गेट कीपर का काम करें। कार्यशाला में जिले के मानपुर, मोहला, अंबागढ़ चौकी, डोंगरगांव और घुमका विकासखंड से मेडिकल ऑफिसर व ग्रामीण चिकित्सा सहायक तथा थामेश वर्मा उपस्थित थे।

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