कोरोना काल में संक्रमण का भयावह दौर चल रहा है। किसी की मौत हो जाती है तो परिवार के सदस्य हाथ नहीं लगा पाते। शवों को अपनों का कंधा नसीब नहीं हो पा रहा है। ऐसे वक्त में पालिका का एक कर्मचारी अपने बेटे के साथ मिलकर पॉजिटिव मृतक का दाह संस्कार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। हाइरिस्क के बाद भी ये योद्धा शहर के भलेसर मार्ग स्थिति मुक्तिधाम में सुबह से शाम तक कोविड- 19 पॉजिटिव शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए डटे रहते हैं और शवों का ससम्मान क्रियाकर्म कर रहे हैं। यह काम पालिका के कर्मचारी अगनू सेंद्रे व उसके बेट हेमनारायण सेंद्रे कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले वर्ष से कोरोना पॉजिटिव का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, लेकिन मौत का ऐसा मंजर आज तक नहीं देखा है।
अप्रैल महीने की स्थिति को सबसे ज्यादा भयावह रही। क्योंकि इस महीने ऐसा एक भी दिन नहीं गया है, जब तीन से चार शव का अंतिम नहीं किया गया हाे। एक चिता ठंडी नहीं हाे पाती कि दूसरा शव मुक्तिधाम में पहुंच जाता है। सुबह से शाम तक केवल शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। अब तो ये नौबत भी आ गई है कि अंतिम संस्कार के लिए लकडि़यां भी कम पड़ रही है अाैर मुक्तिधाम में जगह नहीं है। इसलिए शेड के बाहर शवों को जलाया जा रहा है। वहीं लकड़ियाें की मांग अधिक होने के कारण सप्लाई भी कम हो गई। ऐसे में दानदाताओं से मिल रहे छेना से कोविड-19 पॉजिटिव के शवों को अंतिम संस्कार कर रहे हैं ।
भलेसर मार्ग स्थित मुक्तिधाम में सबसे अधिक कोविड- पॉजिटिव शवों का अंतिम संस्कार हुआ है। पालिका के कर्मचारी अपने बेटे के साथ मिलकर 1 अप्रैल से 1 मई तक की स्थिति में 66 शवों का अंतिम संस्कार ससम्मान किया है। इनकी ड्यूटी पिछले साल से इसी मुक्तिधाम में लगी है। कोविड पॉजिटिव मृतक का अंतिम संस्कार शहर के भलेसर रोड स्थित मुक्तिधाम, ईमलीभाठा व दलदली रोड स्थित मुक्तिधाम में किया जा रहा है।
पालिका के जल प्रभारी विजय श्रीवास्तव ने बताया कि दाह संस्कार के लिए अब समाजसेवी आगे आ रहे हैं। शहर के व्यापारी राजेश लूनिया ने शुक्रवार को कोविड-19 के पॉजिटिव शवों का दाह संस्कार के लिए 3 हजार छेना दान में दिया है। भलेसर स्थिति मुक्तिधाम में दान के छेना से शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। दानदाता ने कहा यदि पालिका को अंतिम संस्कार के लिए छेना की जरुरत होगी तो वो हर संभव सहायता का प्रयास करेंगे।


















