स्वयं चिकित्सा अधिकारी अपने अस्पताल में नहीं कराया कोरोना जांच
मुख्यालय से बीस किलोमीटर एक गांव में कराया कोरोना जांच

धरमजयगढ़। विकास खंड के बायसी कालोनी में पदस्थ चर्चित संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सक हमेशा आला अधिकारियों को बेवकूफ बनाने का काम करते रहा है। मजेदार बात यह है कि बड़े बड़े अधिकारी इसके झांसे में आ भी जाते हैं। अगर इस चिकित्सक के जगह दूसरा कोई होता तो आजीवन सजा भूगतते रहता लेकिन इस संविदा चिकित्सक में पता नहीं ऐसा क्या है कि हमेशा बच जाता है। लेकिन बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी वाली कहावत कभी तो चरितार्थ होगी ही। यह चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बायसी कालोनी का अधिकारी भी है और सेक्टर प्रभारी भी है। वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिला रायगढ़ में केआईटी को कोविड अस्पताल बनाया गया है और जिला के विभिन्न विकास खंड के चिकित्सकों को वहां तैनात किया जाता है। इसी कड़ी में पिछले दिनों एक आदेश उक्त चिकित्सक को भी मिला। आदेश की जानकारी होते ही यह चिकित्सक भागे भागे मुख्यालय से बीस किलोमीटर बरतापाली जा कर कोरोना जांच कराया और अपने आप को कोरोना पाजिटिव घोषित करा लिया। यह सब खेल केवल कोविड अस्पताल केआईटी रायगढ़ में ड्युटी से बचने के लिए। अब यहां विचार करने वाली बात यह है कि यह कोविड जांच कराने इतना दूर जाने की क्या जरूरत? तो यहां यह बताना लाजिमी होगा कि उस एरिया का यह सेक्टर प्रभारी भी है बरतापाली में जिसने जांच किया उसे यह टार्चर करते रहता है उसी डर में चिकित्सक के मनमाफिक उसने रिपोर्ट बना दिया। इस संविदा आयुर्वेद चिकित्सक का यह कोई पहला कारनामा नहीं है इस तरह के इसके कई कारनामें हैं। कोरोना के पहले फेज़ के दरमियान बिजली तार से चिपक कर एक हाथी की मौत हो जाती है। वन विभाग विद्युत विभाग के ऊपर एफ आई आर दर्ज कराता है। विद्युत विभाग के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी होती है। उन्हे जिला जेल का आदेश होता है। जिला जेल भेजने से पहले डाक्टरी मुलाहिजा के लिए सिविल अस्पताल भेजे जाते हैं। इनसे मोटी रकम लेकर संबंधित चिकित्सक से मिलकर उनका कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव घोषित करा देता है जिससे वे तीनों जेल दाखिल होने से बच जाते हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब संबंधित चिकित्सक को कहे अनुसार हिस्सा नहीं मिला। सिविल अस्पताल से रेफर मरीजों को स्वयं के हास्पिटल में ले जाकर इलाज करना पैसा लूटना और जब पेशेंट मरणासन्न में पहुंच जाये तो पुन: शासकीय अस्पताल में भेज देना जैसे कई खुरापाती कहानी इस चिकित्सक के साथ जुड़ा है। ऐसे संविदा चिकित्सक जो हमेशा विवादों में घिरा हो का सेवा वृद्धि कभी नहीं करना चाहिए।और इसके कारनामों की जांच कर सक्त से सक्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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