दुर्ग । विशेषज्ञों ने कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की भी आशंका जताई गई। इस लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है। पहली लहर में कोरोना वायरस ने बुजुर्गों पर अटैक किया जबकि दूसरी लहर में युवकों पर खतरा बढ़ा। ऐसे में तीसरी लहर में कोरोना बच्चों के प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। इससे निपटने को स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दीं हैं।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन सह अधीक्षक डॉ. पीआर बालकिशोर ने बताया, “दूसरी लहर के शांत पड़ने के 5-6 महीने बाद कोविड की तीसरी लहर आ सकती है जिससे निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियों को अंजाम देकर ही बचा जा सकता है। बच्चों को कोरोना की चपेट में आने से बचाने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कई कदम उठा रहे हैं। पिछले दिनों जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ सरकारी अस्पतालों व निजी अस्पतालों के संचालकों के साथ शिशु रोग विशेषज्ञों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सरकारी व निजी अस्पतालों में नार्मल, ऑक्सीजन युक्त व आईसीयू बेड की उपलब्धता की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। निजी अस्पतालों को तीसरी लहर से लड़ने के लिए संसाधन जुटाने के साथ पंजीयन कराने को कहा गया है”। डॉ. बालकिशोर ने बताया, “चंदूलाल चंद्राकर डेडीकेटेड कोविड केयर सेंटर में 700 बिस्तर के साथ सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 350 से अधिक ऑक्सीजन युक्त बिस्तर उपलब्ध है। 60 से अधिक आईसीयू बिस्तर भी तैयार कर लिया गया है। ताकि किसी तरह के महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य अमला 24 घंटे सेवा के लिए तैनात रहेंगे। उन्होंने युवाओं और बच्चों में कोरोना के संक्रमण को लेकर जिले में युवाओं और बच्चों में कोविड-19 महामारी के आंकड़े जुटाएं और उसी अनुसार अनिवार्य कदम उठाएं जाएंगे। इन आंकड़ों का नियमित तौर पर विश्लेषण कर रणनीति बनाने और उसमें जरूरी बदलाव किया जाएगा”।
तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा होने की आशंका को टालने तैयारियां शुरू
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