रायपुर। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज की वचुर्अल बैठक के बाद से ही समाज के भीतर आक्रोश का दौर पनपने लग गया है। समाज का चुनाव टालने संबंधी निर्णय को लेकर लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे है। इसी कड़ी में समाज के युवा नेता हेमंत वर्मा ने कहा है कि महोदय ये तीसरे लहर का इंतजार कर रहे है आपदा में अवसर तलाश करने के लिए समय तो चाहिए न तभी तो वे अपनी मंशा में सफल होंगे किसी की सफलता को रोकना अच्छी बात नहीं है। इस संबंध में हेमंत वर्मा ने पहले ही शंका जाहिर की थी महानुभाव लोग चुनाव कराने के पक्ष में नही है महामारी को ढाल बनाकर अपने पद में बने रहना चाहते है ये प्रत्याशियों के मनोबल तोडने की कोशिश कर अपने स्वार्थ को पूरा करना चाहते है। पता नहीं समाज किस दिशा में जा रहा है। यही होता है जब अयोग्य व्यक्ति को महत्वपूर्ण जगह में बैठा दिया जाता है वे अपने आपको स्वयम्भू समझने लगते है। ऐसे समय मे समाज मे रेफरेंडम की व्यवस्था होनी चाहिए जब लगातार अविवेकपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हो। तब हेमंत वर्मा ने कहा वर्तमान में समाज के चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद केन्द्रीय कार्यकारिणी भी भंग है एवं राज प्रधान के चुनाव में तीन राज के राज प्रधान रायपुर, बलौदाबाजार एवं धमधा राज तात्कालीन राज प्रधान भी प्रत्याशी है, जिसका निर्वाचन अधिकारी द्वारा राज प्रधान पद से इस्तीफ़ा मंजूर करने के उपरान्त ही उन्हे राज प्रधान प्रत्याशी घोषित किया गया है किन्तु कार्यवाहक केन्द्रीय अध्यक्ष डॉक्टर रामकुमार सिरमौर द्वारा दिनांक 6/6/2021को जारी पत्र द्वारा उपरोक्त राज के राज प्रधान जो कि वर्तमान प्रत्याशी भी है को राज प्रधान के सामाजिक दायित्वों को निर्वहन करने अधिकृत किया गया है जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है। चुनाव तिथी का निर्धारण चुनाव अधिकारी द्धारा किया गया था एवं स्थगन उपरांत आगामी तिथी का शीघ्र निर्धारण भी उन्ही के द्वारा निर्धारित किया जावेगा। किन्तु इस बीच केन्द्रीय वर्चुअल बैठक में सामाजिक चुनाव समय को नगर निकाय राजनैतिक चुनाव से जोड़ा जाना उचित प्रतीत नही होता। हेमंत वर्मा ने कहा कृपया केंद्रीय निर्वाचन अधिकारी उचित कार्यवाही करते हुये संवैधानिक उचित निर्देश देना चाहेंगे। हेमंत वर्मा ने कहा जिससे समाज में आक्रोश व्याप्त है तथा समाज के प्रमुखों द्वारा उक्त कार्य प्रणाली विधि सम्मत नहीं होने का आरोप लगाया गया है। जिसमें हेमंत वर्मा द्वारा कहा गया है कि कार्यवाहक केंद्रीय अध्यक्ष एवं कार्यवाहक राज प्रधान को कोई भी नीतिगत निर्णय लेने का संविधान में प्रावधान नहीं है। केवल चुनाव प्रभारी ही प्रत्याशियों के अभिमत से चर्चा कर निर्णय ले सकते हैं जिसका पालन वर्तमान में नहीं किया गया है। उक्त असंवैधानिक निर्णय के संबंध में सर्वश्री चोवाराम वर्मा, उमाकांत वर्मा, लक्ष्मी वर्मा केंद्रीय अध्यक्ष प्रत्याशी तथा भुनेश्वर वर्मा राज प्रधान अर्जुनी राज, दशरथ वर्मा राज प्रधान धरसीवा राज, रूद्र कुमार वर्मा पूर्व केंद्रीय महामंत्री , रघुनंदन लाल वर्मा पूर्व राज प्रधान,खोडराम कश्यप पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष, टेशु लाल धुरंधर, देवेश वर्मा, धर्मेंद्र सरसीहा, ज्ञानेशु राज प्रधान प्रत्याशी, सुरेश वर्मा, श्रीमती दुलारी वर्मा, श्रीमती कांति वर्मा राज प्रधान प्रत्याशी, शिव कुमार वर्मा, दिनेश वर्मा, बृजलाल वर्मा, ठाकुर राम वर्मा, बीआर प्रगनिहा, चेतन वर्मा, पूनम वर्मा, भक्त भूषण चंद्रवंशी, टिकेंद्र, जितेंद्र, चंद्रहास पाटन, पोषण वर्मा, अरुण वर्मा, दिनेश वर्मा धमधा, मिथिला खिचरिया भिलाई, शांति वर्मा, सदा नंदिनी वर्मा,विजय वर्मा, नरोत्तम वर्मा, हिमांशु कश्यप, पंकज वर्मा, रवि वर्मा, चंद्रकांत वर्मा, सोनू वर्मा, प्रवीण वर्मा, राकेश वर्मा, तुलसी वर्मा, संजू वर्मा, गज्जू वर्मा, कौशिक वर्मा सामने आये है जिन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया है।
आपदा में अवसर की तलाश, महानुभाव लोग चुनाव कराने के पक्ष में नहीं, प्रत्याशियों के मनोबल को तोडऩे की कोशिश-हेमंत वर्मा
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