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किसी भी व्यक्ति के सफल जीवन में गुरु का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। गुरु के द्वारा दिखाये गये पथ पर चलकर ही व्यक्ति अपनी मंजिल का पा सकता है। ऐसे ही मां भगवती के उपासक एवं त्रिकालदर्शी चाउर वाले बाबा श्रीश्री नरेन्द्र नयन शास्त्री है जिनके पास बड़ी संख्या में उनके पास उनके शिष्य पहुंचते है और अपनी सारी जिज्ञासाओं को शांत करते हैं। यह सर्वविदित है कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में गुरु और शिष्य के संबंधों का आधार था गुरु का ज्ञान, मौलिकता और नैतिक बल, उनका शिष्यों के प्रति स्नेह भाव, तथा ज्ञान बांटने का नि:स्वार्थ भाव। जो भावना उस समय के हर गुरु में होती थी। वहीं उस समय के शिष्य भी गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा, गुरु की क्षमता में पूर्ण विश्वास तथा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण एवं आज्ञाकारी होते थे, उसके अनुसार अनुशासन को शिष्य का सबसे बड़ा महत्वपूर्ण गुण माना गया है। आज के आधुनिक समय में किसी भी कामयाब व्यक्ति के जीवन पर नजर डाले, तो यह स्पष्ट नजर आता है कि उसको सफलता की बुलंदियों पर पहुचाने में उसके गुरु का अनमोल योगदान रहा है। जीवन में एक अच्छा शिक्षक अपने हर शिष्य को सर्वश्रेष्ठ ज्ञान उपलब्ध करवाने का प्रयास करता है, जिससे कि उसके शिष्य का भविष्य उज्जवल हो और वो सफलता के नित नये आयाम स्थापित करके जीवन को सही मार्ग पर ले जा सके।

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