रायपुर। आज दिनांक 12 जून को दोपहर ढाई बजे कोरोना काल में सीखने और सिखाने की प्रक्रिया जारी रखने के विकल्प पर आनलाइन चर्चा हुई। आज अपने निर्धारित समयानुसार 2:30बजे प्रारंभ हो गया। आज की चर्चा कोरोना काल में बच्चों के सीखने सिखाने की प्रक्रिया और जोड़ रखने के लिए क्या-क्या विकल्प होने चाहिए। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ग्रुप की प्रेरणास्त्रोत हम सभी कुशल मार्गदर्शक श्रीमती कमला बाजपेई की उपस्थिति गणमान्य थी। हमारे पैनलिस्ट मिलिंद चन्द्रा, साबरीन सिद्दीकी, दिलीवार आशा यादव, कादम्बिनी यादव के द्वारा अपने-अपने अनुकरणीय अनुभव को हम सभी के समझ साझा किया गया है जिसमें सर्वप्रथम आशा यादव मैडम के द्वारा बहुत ही अच्छी बात रखी गई कि इस कोविड काल में हम सभी में एकजुट (टीम बनाकर) होकर बच्चों से बात ना करके बच्चों के पालकों से संपर्क करना चाहिए। साथ ही सीखने सीखाने भवका जो भी मटेरियल हम तैयार करते हैं उस मटेरियल को एक जिम्मेदार पालक के घर रखना चाहिए और बीच-बीच में दो शिक्षकों उसका निरीक्षण करना चाहिए ताकि बच्चे सुरक्षित ढग़ से आज की स्थिति में पढ़ाई कर सके। कादम्बिनी के द्वारा समस्त समाज मिलकर कार्य करने पर जोर दिया गया। बच्चों में पढ़ाई के प्रति उनके मन में शिक्षा के ढृढ़ शक्ति जगाना। पालकों व बच्चों की मानसिकता को देखते हुए एक रुचिकर शिक्षा देना वो बच्चों का छोटा समूह बनाकर कार्य पर जोर दिया गया। साबरीन सिद्दीकी के द्वारा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत कमला बाजपेई मैडम के मार्गदर्शन से वर्कसीट जो मिला है बस उनके बच्चों के कौशल विकास की जांच में कारगार सिद्ध हुआ है। अजय सर के द्वारा आज कोरोना काल में बच्चों तक शिक्षा यूट्यूब, आकाशवाणी, दुरर्शन के माध्यम से शिक्षको को अपना विडियो बनाकर ग्राम स्तर का एक ग्रुप बनाकर बच्चों को सीखाया जा सकता है इस बात पर जोर दिया गया। मिलिंद चन्द्रा के द्वारा अपनी बात बड़ी ही सहजता से बहुत सारी बिन्दूओं पर आज की स्थिति परिस्थिति के अनुसार सीखने सीखाने की प्रक्रिया पर अपना अनुभव साझा किया गया जिनमें,उनका कहना है बच्चों से जुड़ाव, रोचकता पूर्ण शिक्षा, समुदाय में जागरूकता,(शिक्षा के क्षेत्र में),स्वअध्ययन, पढऩे के लिए प्रेरित करना, विद्यार्थियों का वर्गीकरण,सहकर्मीयों को मोटिवेट करना, उत्साह बनाऐ रखना, स्वआकलन, योजना बंद्ध अनुकरण, खेल आधारित शिक्षा, पुस्तकालय का प्रयोग, आकलन मूल्यांकन पर पर बहुत ही अनुकरणीय अनुभव साझा किया गया। बालमुकुंद सर को अजय सर के द्वारा रखी बातें अच्छी लगी उनका कहना है बच्चों का ग्रुप बनाकर कार्य करना चाहिए, आदरणीया आशा यादव मैडम को आज की चर्चा में जितनी भी बातें रखीं गई थी उनको उनके सभी सवालों का जवाब मिल गया उनका भी विचार था की जितनी भी बातें रखीं गई है आज बच्चों तक शिक्षा को पहुंचाने के लिए कारगर सिद्व होगा। इस प्रकार अनामिका मैडम, भारती मैडम, ममता साहू मैडम एवं श्रीमती वंदिता शर्मा के द्वारा भी अपने अपने अनुभव को साझा किया गया कि इस कोरोना काल में हम सभी शिक्षक बच्चों तक किसी ना किसी माध्यम से शिक्षा की अलख जगा रहे और अभी भी यह कार्य जारी रखा गया है माध्यम चाहे आनलाइन आफलाइन व्हाट्सएप या पालकों व बच्चों से गृहसंपर्क के माध्यम से ही क्यों ना हो आज अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के माध्यम से हम सभी शिक्षकों को अनुकरणीय मार्गदर्शन मिल रहा है। कार्यक्रम का समापन आदरणीय कमला बाजपेई मैडम के दिशानिर्देश में एक बहुत ही अच्छी जानकारी मिली की माध्यम कुछ भी हो हमको बच्चों के भविष्य को सोचते हुए ही कदम बढ़ाना है कि जो बच्चे आजतक पाठशाला का मुख भी ना देखा हो कम से कम पालकों से संपर्क वर्कशीट के माध्यम से हो, टी एल एम के माध्यम से हो बच्चों का छोटा छोटा समूह बनाकर कार्य करवाया जा सकता है जो हम सभी के लिए अनुकरणीय है वह प्रेरणादाई है।
कोरोना काल में सीखने और सिखाने की प्रक्रिया जारी रखने के विकल्प पर चर्चा
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