रायपुर। रविशंकर विश्वविद्यालय स्थित डाकघर में 10 करोड़ से ज्यादा फर्जी एफडी घोटाला फूटा है। एजेंट ने 50 से अधिक लोगों के पैसे डाकघर में जमा ही नहीं किए। अलबत्ता उनकी पासबुक और एफडी के दस्तावेज बैंक की सील ठप्पे के साथ दिए। एजेंट के पास पैसा जमा करवाने वालों में ज्यादातर विवि के प्रोफेसर, वकील, अफसर और कुछ नेता हैं।पांच साल से किसी के खाते में एक पैसे जमा नहीं किए गए। 3 अप्रैल को एजेंट की बिलासपुर के रेलवे ट्रैक पर लाश मिली और उसी के बाद फर्जी एफडी का घोटाला सामने आया। एजेंट की पत्नी आकांक्षा पांडेय भी इसमें शामिल है। एजेंट भूपेंद्र पांडेय की मौत की खबर सुनकर उसके पास पैसा जमा करवाने वाले एक-एक ग्राहक बैंक और डाकघर पहुंचे।वहां उन्हें पता चला कि उनके खाते में पैसे जमा ही नहीं हुए हैं। भूपेंद्र के पास पैसे जमा कराने वाले ग्राहकों ने अपनी पासबुक और एफडी के दस्तावेज दिखाए। डाकघर में उन सभी दस्तावेजों को फर्जी करार देकर उन्हें लौटा दिया गया। एजेंट की पत्नी भी सामने नहीं आ रही है। उसका मोबाइल भी बंद हो गया है, जबकि वह भूपेंद्र के साथ एजेंट का ही काम करती है। भूपेंद्र और उसकी पत्नी के पास डाकघर की पॉलिसी लेकर पैसा जमा करवाने वाले ज्यादातर अफसर और प्रोफेसर सामने नहीं आ रहे हैं। भूपेंद्र की मौत हो जाने की वजह से सभी हिचक रहे हैं।
सांठगांठ का शक
पुलिस को शक है कि घोटाले में डाकघर के कुछ अधिकारी-कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। उनसे सांठगांठ के बिना ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि 2017-2018 में डाकघर से कुछ बड़ी रकम भूपेंद्र और उसकी पत्नी के खाते में जमा हुई है। एक से पांच लाख तक उनके खाते में जमा किए गए हैं, जबकि भूपेंद्र की खुद की कोई बड़ी पॉलिसी नहीं थी। पुलिस ने कुछ कर्मचारियों को शक दायरे में रखा है।



















