जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज केआश्रम बोरियाकला रायपुर में श्रावण मास के पुनीत पर्व पर प्रतिदिन सायंकाल भगवान सिद्धेश्वर का विशेष द्रव्यों से अभिषेक हो रहा है वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय के समस्त छात्र तथा अध्यापक गण उपस्थित होकर के वेद मंत्रों से रुद्री का पाठ कर रहे हैं। आश्रम प्रभारी डॉक्टर इंदु भवानंद महाराज ने बताया की पुराणों में तथा शास्त्रों में भगवान शंकर को विद्या का प्रधान देवता माना जाता है उन्हें विद्या तीर्थ भी कहा जाता है वे सर्वज्ञ हैं। उन्हें ज्ञान इच्छा एवं क्रिया इन तीनों शक्तियों का समन्वित केंद्र एवं समस्त विद्याओं का स्रोत माना जाता है। व्याकरण शास्त्र के रचयिता पाणिनि ने भी भगवान शिव की उपासना करके चौदह सूत्रों को प्राप्त करके संस्कृत व्याकरण की रचना की थी पाणिनि के संबंध में कहा जाता है कि उनकी माता दाक्षी तथा पिता पणिन् थे, इन्होंने बचपन में ही आचार्य उपवर्ष के यहां विद्याध्ययन प्रारंभ किया था।व्याडि तथा वररुचि (कात्यायन) इनके सहपाठी थे एक दिन पाणिनि व्याकरण शास्त्र सम्बन्धी ज्ञान मैं अपने सहपाठियों से हार गए जिससे उनके हृदय में गहरी चोट लगी। शास्त्र में पारदर्शी होने के उद्देश्य से उन्होंने आशुतोष भगवान शंकर की उपासना की परिणामतः उन्हें भगवान शंकरकी डमरू से 14 सूत्रों की प्राप्ति हुई । यही चौदह सूत्र पाणिनि व्याकरण का मूल आधार है उसे ही माहेश्वर सूत्र कहते हैं। प्रत्येक ज्ञान पिपासु को भगवान शंकर की उपासना सावन के मास में रुद्राभिषेक के रूप में अवश्य करना चाहिए।
Previous Articleपति को आया गुस्सा, काट डाले पत्नी के बाल
Related Posts
Add A Comment
chhattisgarhrajya.com
ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
Important Page
© 2025 Chhattisgarhrajya.com. All Rights Reserved.


















