कोण्डागांव। लगभग 4 वर्ष पहले तक विकासखण्ड फरसगांव के ग्राम गट्टीपलना के कृषक ’’अंजोरी नेताम’’ गांव के अन्य कृषको के भांति अपने कृषि भूमि में सीजन के फसल के रूप में धान एवं मक्का फसलो से जीवन निर्वाह तक ही सीमित रहते थे और इन फसलो से होने वाली आय से ही उनका परिवार आश्रित रहता था। परंतु वर्ष 2017-18 में उद्यानिकी विभाग से संपर्क से उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ आया एवं उनकी योजनाओं में उनकी उत्साह वर्धक भागिदारी उनके कृषि जीवन की काया पलट हो गई। तत्पश्चात विभाग की मार्गदर्शन में उन्होने दृढ़ निश्चय के साथ सब्जी तरकारी उत्पादन में अपना हाथ आजमाया और अपनी 2 एकड़ की भूमि में लौकी, भिण्डी, करेला उगाना शुरू किया और जाहिर है इसके आशातीत परिणाम भी मिलने लगे और वर्तमान में उनके खेतो में साग भाजियों का अंजोर फैला दिख रहा है। अंजोरी बताते है कि विभाग के सौजन्य से उन्हे ड्रीप स्प्रिगंकलर, पावर वीडर अनुदान के रूप में प्राप्त हुआ। इस तरह रबी फसल के रूप में उन्होने 2020-21 में अपनी 1 एकड़ में मिर्च की खेती की जिसमें 2.80 लाख रूपये की लागत में उन्हे कुल 7.24 लाख रूपये की मुनाफा हुआ। उनका यह भी कहना है की उद्यानिकी विभाग की सतत् संपर्क मार्ग दर्शन से और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत् अच्छा उत्पादन कर रहें है और तो और फसले अब पहले के मुकाबले अच्छी और ज्यादा हो रही है। इस तरह विभाग के द्वारा उन्हे नवीन योजनाओं की जानकारी मिलती तो है ही साथ ही क्रियान्वयन से सभी समस्यों का समाधान आसानी से हो जाता है।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन अपने अभियान को सार्थक करता हुआ जिले के कृषको के कृषि परिपाटी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है जहां पहले जिले के कृषक मात्र धान की खेती पर निर्भर रहतें थे आज वे पंरपरागत कृषि से इतर अन्य लाभकारी फसलो एवं सब्जियों के उत्पादन पर अपना ध्यान कें्रदित कर रहे है। यहां गौरतलब है कि जिले के दूरस्थ क्षेत्र जहां छोटे और मंझोले दर्जे के कृषकों के पास धान के अलावा अन्य कृषि विकल्प नही थे वहां यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय बागवानी के मार्गदर्शन से नये कृषि प्रयोग करने वाले इच्छुक कृषकोें में उत्साह का संचार हुआ हैैै। कृषक अंजोरी नेताम बेबाकी से कहते है कि नये बदलते कृषि प्रयोग में नयी परिपाटी से कृषि करने में ही समझदारी है और सबसे बड़ी बात विभाग द्वारा इसमें सहयोग दिया जाना बहुत बड़ा संबल है विशेष तौर पर राष्ट्रीय बागवानी मिशन के घटक सब्जी क्षेत्र विस्तार से स्थानीय कृषकों को साग भाजियों के पैदावार बढ़ाने में मदद मिली है और साथ उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है और अब स्थानीय कृषको नये प्रयोग करने में हिचक नही होती और उनके जैसे छोटे कृषक लाभान्वित हो रहे है।

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