
धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ शासन की महत्त्वाकांक्षी व्यवस्थापन योजना के तहत धरमजयगढ़ में अंधाधुंध पंजीकरण कराने का मामला सामने आया है। मामला धरमजयगढ़ नगर पंचायत अन्तर्गत वार्ड क्रमांक आठ पतरापारा का है। यहां बेजाकब्जा कर बाहरी व्यक्ति शैलेन्द्र नाथ बाला आत्मज मुकुंद बाला ने घर बना लिया जिसकी शिकायत न्यायालय तहसीलदार धरमजयगढ़ में की गई थी। बताया गया कि पतरापारा धरमजयगढ़ में भूखंड क्रमांक 9/1084 क्षेत्रफल 170 वर्गफीट भूमि राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत स्थित है। इस शिकायत पर तहसीलदार ने पटवारी हल्का नंबर 56 धरमजयगढ़ को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया। जांच प्रतिवेदन में राजस्व निरीक्षक ने भूमि को अनावेदक गणों निजी भूमि से लगा हुआ पूर्वजों के द्वारा किया गया कब्जा कर खेती करने का पंचनामा रिपोर्ट सौंप दिया गया। यहां तक सब ठीक-ठाक था। अचानक उक्त विवादित मकान का 2015-16 से 2019-20 तक नित्यानंद सरकार आत्मज गौरपद सरकार के नाम से नगर पंचायत धरमजयगढ़ में पांच साल का समेकित कर पटा कर रसीद पेश कर दिया गया। यहीं राजस्व निरीक्षक ने उच्चाधिकारियों को गुमराह कर आगे कार्यवाही हेतु नजूल अधिकारी के न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। इसके बाद आगे की कार्यवाही विधिवत चलने लगा। इस बात की जानकारी आवेदक आदिवासी किसान अंगद सिंह राठिया को हुआ तो उसने भी न्यायालय का शरण लिया। अधिवक्ता के माध्यम से उन्होंने वास्तविकता जानी तो जमीन से पांव खिसक गया। नगर पंचायत धरमजयगढ़ ने जानकारी दी है कि उनके यहां किसी नित्यानंद सरकार आत्मज गौरपद सरकार के नाम से समेकित कर नहीं जमा हुआ है बल्कि शैलेन्द्र नाथ बाला आत्मज मुकुंद बाला के नाम से पांच साल का समेकित कर जमा हुआ है और उसी रसीद में छेड़छाड़ कर नित्यानंद सरकार ने अपना नाम अंकित कर दिया है। इस वास्तविक तथ्य को राजस्व निरीक्षक ने छुपाकर उच्चाधिकारियों को गुमराह किया है। जबकि राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत मिलने वाली पट्टा अहस्तांतरणीय होता है। इस धरमजयगढ़ में राजस्व निरीक्षक द्वारा भारी लेन-देन कर गरीब आदिवासियों के काबिज जमीन को दूसरों के नाम से पंजीयन कराने की कोशिश की जा रही है।


















