रायपुर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य में स्कूली बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा प्रदान करने की विशेष पहल शुरू की गई है। इसी पहल के तारतम्य में स्कूली बच्चों को गांव की अध्ययन-भ्रमण पर ले जाए जाने की योजना है। स्कूली बच्चे गांव के अध्ययन-भ्रमण के दौरान ग्रामीण जनजीवन, खेती-किसानी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बुनियादी सपनों को पूरा करने के लिए उनके आदर्शों एवं सिद्धांतों के बारे में जानेगें। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के गांवों के अध्ययन-भ्रमण को लेकर विस्तृत रूप रेखा तैयार की गई है, जिसमें कक्षा 5वीं से 12वीं तक बच्चों को गांवों का भ्रमण कराया जाएगा और उनके शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में ग्रामीण जनजीवन, खेती-किसानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन जैसे मुद्दे शामिल किए जाएंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा गांधी जी की ग्राम सुराज की परिकल्पना के आधार पर गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के अंतर्गत नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण के माध्यम से स्थानीय संसाधनों के संरक्षण एवं सदुपयोग से ग्रामीण जनजीवन को खुशहाल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूली बच्चे ग्राम भ्रमण के दौरान गांधी जी के आदर्शों एवं सिद्धांतों से बच्चों का अवगत करवाए जाने, बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाने के लिए जागरूकता, नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी, जल संरक्षण और मृदा संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवहारिक हासिल करेंगे। इस अध्ययन-भ्रमण के माध्यम से बच्चों को ग्रामीण जनजीवन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संबंध में छोटे-छोटे प्रोजेक्ट उनके शैक्षणिक के अनुरूप दिए जाएंगे।  ग्राम भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों के साथ उनके शिक्षक, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, इच्छुक पालक एवं ग्रामीण विकास योजनाओं से जुड़े अधिकारी साथ रहेंगे और विभिन्न योजनाओं की जानकारी देंगे। विद्यार्थी गांव में घूमकर वहां के किसानों, परिवारों, विभिन्न स्व-रोजगार से जुड़े स्थानीय व्यवसायियों, लोक कलाकारों और पंचायत के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर चर्चा करेंगे।  विद्यार्थी किसानों से चर्चा कर उनसे खेती-बाड़ी, फसलों की जानकारी लेंगे। किसानों को गौपालन से खेती में क्या लाभ मिलाता है और वर्तमान में उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कौन-कौन सी नई योजनाएं संचालित है, इसकी भी जानकारी हासिल करेंगे। गांवों के स्वच्छता के बारे में चर्चा की जाएगी और गांवों को कैसे स्वच्छ रखा जाता है यह भी देखने और समझने का प्रयास बच्चे करेंगे। गांवों में  ऐसे कौन-कौन स्थान है, जहां से गंदगी का खतरा होता है और उससे कैसे बचा जा सकता है ? सफाई के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कैसे की जानी है ?  ग्राम भ्रमण के दौरान विद्यार्थी विभिन्न व्यवसायों की जानकारी भी लेंगे और अपने शिक्षक से स्वयं इस प्रकार की विभिन्न व्यवसायों के बारे में जानेगें और सीखेंगे। वे महिला स्व-सहायता समूहों से चर्चा कर उनके द्वारा स्व-रोजगार के माध्यम से आर्थिक विकास की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी लेंगे। विद्यार्थी गांव में घूम-घूमकर नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना का अवलोकन करेंगे। गौठानों में गौपालन एवं गोबर से खाद बनाने की विधि देखेंगे और समझेंगे। गांवों में जल संरक्षण और मृदा संरक्षण के कार्यों का अवलोकन तथा वर्षा जल संरक्षण, जल का समुचित उपयोग एवं वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण सुरक्षा के बारे में जानकारी हासिल करेंगे।  विद्यार्थियों को ग्राम भ्रमण के उपरांत उनके अनुभव के आधार पर छोटे-छोटे प्रोजेक्ट दिए जाएंगे जिसमें खेती-बाड़ी की आधुनिक तकनीक, गौपालन से किसानों की आय में वृद्धि के उपाय, नदियों, कुंओं और तलाबों को स्वच्छ रखना, गोधन न्याय योजना से ग्रामीण जनजीवन में आए आर्थिक परिवर्तन, किसानों के हित में संचालित योजनाओं में सुधार, जल संरक्षण, गौठानों में गोबर से जैविक खाद बनाने की विधि, स्थानीय कलाओं, शिल्प और कुटीर उद्योग को बचाने के उपाय के बारे में केस स्टडी शामिल हैं। 

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