रायपुर। यह भारत देश की परंपरा रही है, जो हम अपने मातृभूमि से ग्रहण करते हैं, उसे लौटाते हैं। आज आप लोगों द्वारा यही किया जा रहा है। आप लोग भारतीय परंपरा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर रहे हैं। जिस देश से आप लोगों ने शिक्षा ग्रहण की अब उसका उपयोग कर यह शोध किया है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जो उपकरण ईजाद किया है वह पूरे देशवासियों का काम आ रहा है। उक्त बातें राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने पंजाब विश्वविद्यालय पीजीआईएमईआर एवं मोलेक्यूल यूएसए संस्था द्वारा आयोजित वेबिनार में कहीं।राज्यपाल ने कहा कि ग्रंथों में पवन को गुरु का दर्जा दिया है लेकिन, इस बात का खेद है कि आधुनिकीकरण और विकास के नाम पर वायु को दूषित किया जा है। संस्था के द्वारा दिए गए एयर प्यूरीफायर को छत्तीसगढ़ के ट्राईबल और दूरस्थ इलाकों में दिया है ताकि बीमारी से लड़ने में उन्हें मदद मिले। आज पूरा विश्व, हमारा देश कोरोना से लड़ने के लिए कमर कस चुका है। उन परिस्थितियों में यह उपकरण एक प्रमुख हथियार साबित होगा। अस्पताल तथा शासकीय कार्यालयों व अन्य स्थानों में कोरोना संक्रमण रोकने में प्रमुख भूमिका निभाएगा और निश्चित ही कोरोना की तीसरी लहर को हम रोक पाएंगे और जल्द ही हमारा देश सामान्य स्थिति में आएगा और हमारे देश को हम कोरोना मुक्त कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय आज के आधुनिकीकरण के दौर में, सुविधाएं तो बहुत है, लेकिन इन सबकी एक कीमत भी हम चुका रहे हैं, जैसे दूषित वायु। इसके समाधन के लिए, मेरा मानना है कि विज्ञान-ज्ञान के साथ विश्वस्तरीय सहयोग-शोध की आवश्यकता भी है। 

राज्यपाल ने कहा-इस दिशा में मोलेक्यूल यूएसए संस्था के प्रमुख, आचार्य जसप्रीत धऊ व पंजाब विश्वविद्यालय से आचार्य राज कुमार जी, गंगा राम चौधरी एवं आचार्य राजीव कुमार की भागीदारी एवं सहयोग की मैं सराहना करती हूँ। मुझे बताया गया कि मोलेक्यूल यूएसए द्वारा बनाया गया उपकरण इंडोर वायु को शुद्ध करने के लिए जाना जाता है। इस उपकरण की कार्यक्षमता वायरस और सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने में पूर्णतय सक्षम है, जिसकी प्रमाणिकता शोध के आधार पर की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि दूषित वायु का सबसे ताजा उदाहरण, कोरोना संक्रमण है। यह संक्रमण वैसे तो आया है एक वायरस के कारण, लेकिन इसके विस्तार में आधुनिकरण का बहुत योगदान है। वैसे आधुनिक विज्ञान ने कोरोना संक्रमण को रोकने और इस की चिकित्सा के लिए काफी सराहनीय काम किया है। इसी दिशा में, वायरस मुक्त वायु की जरुरत भी एक केंद्र बिंदु रहा है जो कि शोध से भी साबित हो चुका है। 

राज्यपाल ने कहा कि इस उद्देश्य में मोलेक्यूल एयरप्यूरीफायर का काम बहुत सराहनीय है। जनकल्याण हेतु, इस कंपनी ने 50 से अधिक उपकरण अस्पताल में दान के रूप में दिए हैं, जिनकी कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये है। यह सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मोलेक्यूल उपकरण बहुत सारे हॉस्पिटल्स के कोविड वार्ड में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। कोरोना वायरस के साथ-साथ यह उपकरण वायु में उपस्थित दूसरे नुकसानदायक जीवों और दूषित तत्वों को भी नष्ट करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके परिणाम हेतु, डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मी एवं रोगियों के परिजनों को भी स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है। जो कि काम के साथ-साथ, उत्साहवर्धन एवं मानसिक संतुष्टि मेें भी बहुत लाभकारी है। मैं इनके काम और सहयोग की सराहना करना चाहूँगी और एक आग्रह भी कि स्वच्छ वायु, बाहर या अंदर की उपयोगिता का जनहित में जागरण स्वरूप प्रसार एवं प्रचार किया जाये। 

उन्होंने कहा कि इसके साथ साथ मैं कुलपति जी को आमंत्रित करती हूँ कि वे छत्तीसगढ़ के अनुसंधान केंद्रों, शोधार्थियों तथा उद्योगों के साथ प्रगतिशील संबंध विकसित करें ताकि इस केंद्र की अति-उत्कृष्ट सुविधाओं के द्वारा छत्तीसगढ़ के उद्योग तथा अनुसंधानकर्त्ता लाभान्वित हो सकें।

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