सफलता की कुंजी कहती है कि व्यक्ति को अपनी क्षमता, प्रतिभा और कर्तव्यों का बोध होना अत्यंत आवश्यक है. जब इन बातों को व्यक्ति भूलाने लगता है तो वो सफलता से दूर होने लगता है. जीवन में सफलता प्राप्त करना सरल कार्य नहीं है. इसके लिए कठोर परिश्रम करना पड़ता है. परिश्रम के महत्व को जानता है उसे धन की देवी लक्ष्मी जी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसे व्यक्ति को मान-सम्मान भी प्राप्त होता है. लोकोक्तियाँ या कहावतें भाषा की सरलता और सुदंरता को बताती हैं. ऐसी ही एक कहावत है, ‘बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही’. इस कहावत में जीवन की सफलता का राज छिपा हुआ है. इस कहावत का अर्थ है कि व्यक्ति को यदि उसे अपना कार्य करने का अवसर न दिया जाए तो उसकी प्रतिभा किसी के काम नहीं आती है. जिस प्रकार से घोड़े को यदि घुमाया न जाए तो घोड़ा अपनी क्षमता को भूल जाता है. उसका उपयोग करना मुश्किल हो जाता है. उसी प्रकार यदि सैनिक को युद्ध का अभ्यास न कराया जाए तो, सैनिक की प्रतिभा व्यर्थ हो जाती है. इसलिए व्यक्ति को अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारते रहने का प्रयास करना चाहिए.
अनुशासन- सफलता की कुंजी कहती है कि व्यक्ति को अपनी प्रतिभा का सही उपयोग करने के लिए कठोर अनुशासन का पालन करना चाहिए. अनुशासन का पालन करना, जीवन में सफलता प्रदान करता है. अनुशासन से आलस का नाश होता है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं आलस एक ऐसा अवगुण है, जो व्यक्ति को लक्ष्य से दूर करता है.
समय पर कार्य को पूर्ण करें- सफलता की कुंजी कहती है कि व्यक्ति को समय की उपयोगिता और महत्व के बारे में भी जानना चाहिए. समय पर कार्य को आरंभ करना चाहिए और समय पर ही कार्य को पूर्ण करने का प्रयास करना चाहिए. इसके साथ जो व्यक्ति अपने सभी महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूर्ण करता है, उसे सफलता अवश्य प्राप्त होती है. ऐसे व्यक्ति आसानी से अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं.

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