रायपुर। वर्ल्ड निमोनिया डे 12 नवम्बर के अवसर पर गत दिवस ’सॉस’ जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रायपुर जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल के मार्गदर्शन मेंनोडल डॉ. आशीष वर्मा एवं सलाहकार डॉ. रंजना गायकवाड ने गुगल मीट के द्वारा जिले के विकासखण्डों के चिकित्सा अधिकारियों की मीटिंग ली। नोडल डॉ. आशीष वर्मा ने ’सॉस’ जनजागरूकता कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ’’निमोनिया नही, तो बचपन सही’’। सलाहकार डॉ. रंजना गायकवाड ने बताया कि 0 से 05 वर्ष तक के बच्चांे की अधिकांश मृत्यु निमोनिया से होती हैं। उन्होंने निमोनिया के प्रबंधन तथा मितानिन एवं ए.एन.एम. के द्वारा निमोनिया के शुरुवाती लक्षणो को पहचानने तथा इलाज की सृदृढ़ीकरण करने एवं उपयोगी दवा मितानिनो के पास उपलब्ध रखने पर जोर दिया। उन्होंने मितानिनों से कहा कि बच्चों की गंभीरता को देखते हुए नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रो पर रिफर करें, जिससे निमोनिया से होने वाली मृत्यु को कम किया जा सके।
निमोनिया क्या है?
निमोनिया फेफड़ो में रोगाणुओं के संक्रमण से होता हैं, निमोनिया एक गंभीर बीमारी हैं। देश में 05 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का ये सबसे बड़ा कारण हैं। इसलिये घरेलू उपचार में समय ना गवाएं। निमोनिया के लक्षण पहचान कर बच्चे को तुरन्त स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पास या स्वास्थ्य केन्द्र ले जाएं। निमोनिया के लक्षण हैं, खाँसी और जुकाम का बढ़ना, तेजी से सॉस लेना, सॉस लेते समय पसली चलना या छाती का नीचे धंसना, तेज बुखार आना। निमोनिया के गंभीर लक्षण हैं, खा-पी नहीं कर पाना, झटके आना, सुस्ती या अधिक नींद आना। लक्षण दिखते ही बच्चें को नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र जाना चाहिए।
निमोनिया से बचाव के लिए क्या करें ?
1. जन्म के पहले घंटे में स्तनपान, 2. जन्म से 06 माह तक केवल मां का दूध पिलाएॅ 3. 06 माह के बाद ऊपरी ठोस आहार भी शुरू करें 4. पीने का पानी ढंक कर रखे 5. खाना पकाने और खिलाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं 6. बच्चे के शरीर को ढककर रखें 7. सर्दियों में ऊनी कपड़े पहनाये और जमीन पर नंगे पाँव ना चलने दें 8. बच्चे का संपूर्ण और समयानुसार टीकारण करवाएँ 9. घर में धुआं ना होने दें और खिड़कियां खुली रखें 10. खाना एलपीजी गैस स्टोव पर ही पकाएँ।


















