अमलेश्वर। राजधानी रायपुर डीडीयू आडिटोरियम में बाल दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा समागम में प्रदेश के साथ ही अन्य प्रदेश के शिक्षकों ने भी शामिल हुये और कोरोना काल मे बच्चो की बेहतर पढ़ाई के लिये किये गये अलग अलग नवाचारी पहल गतिविधियों का स्टाल लगाकर प्रदर्शन किया इस कार्यक्रम मे हमारे अमलेशवर स्कूल से तीन शिक्षिकाओ श्रीमती स्मृति दुबे, लालिमा चन्दराकर, उषा वर्मा ने भाग लिया जो क्षेत्र वासियों के लिये भी गौरव की बात है, जिसमे अमलेशवर हाई स्कूल से जीव विज्ञान विषय की व्याख्याता शिक्षिका श्रीमती स्मृति दुबे ने आन लाइन पढाई, पढाई तुहर दुवार मे सक्रिय भूमिका निभाते हुये बच्चों की पढ़ाई को और सुगम ,सरल, व बेहतर मनोरंजक बनाने के लिये विज्ञान मेहंदी व रंगोली ,विज्ञान कार्टून, व मिट्टी से बने शिल्प कला जैसे संसाधनों का प्रयोग कर बच्चो मे पढाई के लिये कुछ अलग ही माहौल पैदा कर बच्चो को कोविड काल में भी पढाई के लिये जोडे रही।

इसी तरह प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती लालिमा चन्दराकर व उषा वर्मा ने भी छोटे बच्चों को पढाई के प्रति विशेष रूचि पैदा करने के लिये कपडे व मोजे से मास्क व मुखौटा बनाकर विशेष रूचि पैदा करने मे सफल हुई हैं ,प्रायः देखा गया है कि छोटे बच्चों मे सीधे पाठ्य पुस्तक पढने में कुछ ही देर बाद बोरियस टाइप हो जाते हैं, वहीं काटून व मुखौटा के रूप लेकर पढाने में बच्चों मे विशेष रूचि व उत्साह देखा गया है। प्रदर्शनी स्थल में कुल 12 स्टाल लगाये गये थे, जिनमे से छटवा नंबर का स्टाल में हमारे अमलेशवर स्कूल की शिक्षिकाए शामिल रही , इस स्टाल का माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने अवलोकन किया और अपने विधान सभा छेत्र से होने के लिये सभी शिक्षिकाओ को बधाई देते हुये प्रोत्साहित किया, इस स्टाल में हमारे बस्तर से बाल कलाकार मेरा बसपन का प्यार कही भूल नहीं जाना रे से प्रसिद्घ हुये सहदेव दरिदो भी शामिल रहे जो लोगों के लिये भी आकर्षण का केन्द्र रहा,जिनके साथ मुख्य मंत्री भूपेश बघेल जी ने सभी शिक्षको व बच्चो सहित ग्रुप फोटो कराया।



















