आदिवासी तभी सशक्त होंगे जब उनकी वास्तविक आवश्यकताओं पर ध्यान देकर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। संविधान में आदिवासियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं परन्तु उन्हें उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करना होगा। यह बात राज्यपाल सुश्री राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा ‘‘ट्राइबल ट्रांजिशन इन इंडिया: इशूस, चैलेंजेस एंड द रीड अहेड’’ विषय पर वर्चुअल रूप से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति को इस वेबीनार के लिए शुभकामनाएं दी और भविष्य में ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने को कहा।
राज्यपाल ने कहा कि आमतौर पर यह कहा जाता है कि भारत की आत्मा ग्रामीण इलाकों में बसती है। ठीक इसी प्रकार छत्तीसगढ़ प्रदेश की आत्मा भी जनजातियों में ही बसती है और जिस प्रकार जीव के उत्थान के लिए आत्मा का उत्थान आवश्यक है उसी प्रकार आदिवासी जन समुदायों के उत्थान से ही हमारे प्रदेश सहित भारत की उन्नति संभव है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गुंडाधुर, शहीद गैंदसिंह जैसे कई नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा भी कई ऐसी जनजातीय हस्तियाँ हैं, जो इतिहास के पन्नों में गुम हैं। हमें इनका नाम सामने लाने के प्रयास करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि हमें इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए कि उन्नति का अर्थ जनजातियों के रुख को आधुनिकता और भौतिकतावाद की तरफ मोड़ देना नहीं होता, बल्कि उन्नति का असली अर्थ, उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर, संभालकर और उसे आगे बढ़ाकर जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना होता है।

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