पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की शिकायत के बाद, केरल के पलक्कड़ जिले में पुलिस ने मलमपुझा गांव में एक अवैध बैलगाड़ी दौड़ आयोजित करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एनिमल प्रोटेक्शन ग्रुप को इस घटना के बारे में द हिंदू अखबार की एक तस्वीर से पता चला जिसमें दो बैलों को जबरन दौडऩे के लिए मजबूर किया गया उनकी नाक की रस्सियों को हिंसक रूप से खींचा गया। पलक्कड़ के जिला पुलिस प्रमुख को औपचारिक शिकायत सौंपने के बाद, पेटा ने इस मामले पर पलक्कड़ के पुलिस उपाधीक्षक, हरिदासन के साथ मिलकर काम किया। इस मामले में छह व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 11 (1) (ए) के प्रावधान शामिल हैं, जो एक जानवर को मारना, पीटना जानवर को अनावश्यक दर्द पीड़ा देना दंडनीय अपराध बनाता है। सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। पेटा के एक अधिकारी ने कहा, काम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैल पहले से ही दौड़ के लिए मजबूर होने की अतिरिक्त पीड़ा के बिना कठिन जीवन जीते हैं। हम पलक्कड़ पुलिस की सराहना करते हैं कि जानवरों के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दौड़ के दौरान, बैल डर के मारे दर्द से बचने के प्रयास में भाग जाते हैं। वे आमतौर पर अपनी नाक की रस्सियों से शुरूआती लाइन तक जाते हैं, कील-जड़ी हुई छडिय़ों जैसे हथियारों से उन्हें मारा जाता है उनकी टेलबोन्स अक्सर जोड़ से तोड़ दी जाती हैं ताकि उन्हें तेजी से दौडऩे के लिए मजबूर किया जा सके। 5 सितंबर, 2014 को, केरल के उच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित किया जिसमें कहा गया था कि यह 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की टिप्पणियों विचारों से बाध्य है, जिसमें 11 जुलाई, 2011 की केंद्र सरकार की अधिसूचना द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखा गया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बैल शारीरिक रूप से रेसिंग के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031