आज से देवताओं की दिशाओं से प्रकाश और ऊर्जा प्राप्त होना शुरू हो गई है, मतलब साफ है कि उत्तरायण पर्व शुरू हो गया है. यह काल अगले 6 माह तक रहेगा लेकिन इस बीच एक माह फिर ऐसा आएगा जो मलमास के नाम से जाना जाएगा और इस दौरान मंगल कार्य भी रुक जाएंगे. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास के मुताबिक अभी तक मलमास अर्थात गुरु दित्य दोष का काल चल रहा था. जब सूर्य धन अथवा मीन राशि में रहता है तो यह काल शुरू होता है. वर्तमान में उत्तरायण पर्व शुरू हो गया है. पूर्व में सूर्य धन राशि में था इस बार की मकर संक्रांति धन मकर संक्रांति के नाम से जानी जा रही है. पंडित व्यास के मुताबिक, जब गुरुदित्य दोष रहता है उस समय असुर शक्तियां प्रभावशाली हो जाती हैं और मंगल कार्य नहीं होते हैं. आज से उत्तरायण पर्व शुरू हो गया है. सूर्य का प्रकाश और ऊर्जा उत्तर दिशा से प्राप्त होगी. उत्तर की दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है, इसलिए अब दैवीय शक्तियां प्रभावशाली हो जाएंगी. इस दौरान शुभ और मंगल कार्य भी होंगे. जब असुरी शक्ति प्रभावशाली रहती है उस दौरान यदि कोई मंगल कार्य करता है तो वह असफल होता है. पंडित व्यास के मुताबिक 15 मार्च से 14 अप्रैल तक एक बार फिर सूर्य मीन राशि में आ जाएगा फिर मंगल कार्य एक माह के लिए थम जाएंगे. भीष्म पितामह ने महाभारत काल में सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. पंडित आनंद शंकर व्यास के मुताबिक यदि उत्तरायण काल में मृत्यु होती है तो मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए भीष्म पितामह ने शरीर त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. इसके बाद उन्होंने प्राण त्यागे थे. पंडित व्यास के अनुसार शुभ और मंगलकारी कार्य जब शुभ मुहूर्त में किए जाते हैं तो वह सफल होते हैं. इसी वजह से मलमास के दौरान सारे मंगल कार्य बंद रहते हैं. पंडित आनंद शेखर व्यास के मुताबिक मकर संक्रांति पर्व पर गुल्ली डंडा और पतंगबाजी होती है. हालांकि इसका शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं है लेकिन जब सूर्य की किरणें उत्तर की दिशा से शुरू होती हैं, इस दौरान लोग अधिक समय छत पर गुजारते हैं. इसी के चलते मनोरंजन के दृष्टिकोण से पतंगबाजी को अधिक महत्व दिया गया.
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