जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के द्वारा स्थापित शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में परांबा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी ललिता प्रेमाम्बा का नवावरण श्री यंत्र का विशेष पूजन चल रहा है श्री यंत्र के इस विशेष पूजन को परिवार अर्चन के नाम से भी जाना जाता हैं, श्री यंत्र के दर्शन करने मात्र से क्लोरो यज्ञ करने का पुण्य प्राप्त होता है जिसके घर में श्री यंत्र रहता है कभी भी उसके घर में दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता है, श्री यंत्र के चलो तक पीने से कठिन से कठिन असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है धन की कभी कमी नहीं होती है राजराजेश्वरी के सहस्त्रनाम का पाठ करने से अलभ्य वस्तुओं की भी प्राप्ति हो जाती है।
राजराजेश्वरी के श्री यंत्र के दर्शन से पूजन करने का पुण्य प्राप्त होता है जो पुण्य पूजन करने से प्राप्त होता है वही पुण्य पूजन के दर्शन करने मात्र से प्राप्त हो जाता है।
शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में नित्य प्रति नवरात्रि के पर्व पर सायंकाल राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी के हजार नामों से कमल गुलाब आदि पुष्पों से प्रतिदिन अर्चन हो रहा है, राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी श्री विद्या की एकमात्र अधिष्ठात्री हैं किसी भी व्यक्ति को जन्म जन्मांतर की पूर्व साधना के परिणामस्वरूप ही श्री विद्या अथवा ललिता सहस्रनाम की साधना प्राप्त होती है इसमें कोई संदेह नहीं है, मां ललिता राजराजेश्वरी सौंदर्य ,आनंद और अनुग्रह की साक्षात मूर्ति है। त्रिपुर सुंदरी कीट से लेकर ब्रह्मा तक की माता है, वे क्रिया शक्ति की प्रतीक है जगत की सभी वस्तुएं उनकी हैं। शंकराचार्य आश्रम में माताका स्फटिक मणिमय श्री विग्रह विराजमान है स्फटिक मणि की देवी के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।
विश्व का पहला एकमात्र यह श्री विग्रह है जहां पर स्फटिक मणि में देवी राजराजेश्वरी का पूजन होता है
त्रिपुर सुंदरी भोग और मोक्ष दोनों देती है – इन्दुभवानन्द महाराज
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