
रायपुर। छत्तीसगढ़ के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों का राज्य के किसानों के आय दुगुनी करने में योगदान विषय पर राज्य स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 7 अप्रैल को कृषि विज्ञान केन्द्र पाहंदा (अ) में निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विद्यालय रायपुर, डॉ. आरके बाजपेयी की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें राज्य के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों के समस्त वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, विषय वस्तु विशेषज्ञ, व कार्यक्रम सहायक उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर, डॉ. गिरीश चंदेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों के स्वागत से हुआ एवं कृषि विज्ञान केन्द्र पाहंदा (अ) दुर्ग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विजय जैन ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा रखी तत्पश्चात निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विद्यालय रायपुर, डॉ. आरके बाजपेयी ने राज्य के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों के कार्ययोजना व वर्तमान परिदृश्य के बारे में प्रस्तुति की एवं कृषि के आय को दुगुनी करने में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिकाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम के अगले क्रम में सह संचालक व अनुसंधान, इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर, डॉ. विवेक त्रिपाठी ने बताया कि टिकाउ खेती के माध्यम से किसानों की आय दुगुनी की जा सकती है। तत्पश्चात कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर, डॉ. गिरीश चंदेल ने भविष्य में कृषि विज्ञान केन्द्रों की जिम्मेदारियों के बारे में चर्चा की। उन्होंने आश्वस्त किया कि कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक नवीन कृषि तकनीकों को राज्य के प्रत्येक ग्राम पहुंचाएंगे और इसके लिए पूरा विवि परिवार हरसंभव प्रयास करेगा और किसानों के खेत तक पहुंचना सुनिश्चित करेंगे। कुलपति ने किसानों के उत्पाद विक्रय हेतु उचित बाजार की आवश्यकता की भी विशेष रूप से चर्चा की जिसमें किसानों के उत्पाद समय पर बिक्री केन्द्रों तक पहुंच सके एवं उन्हें आय प्राप्त हो सके। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुखों ने अपने जिले में किये जा रहे कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके उपरांत कृषि विज्ञान केन्द्रों के सभी वरिष्ठ वैज्ञानिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहायकों ने मिलकर कार्ययोजना तैयार की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन व आभार प्रदर्शन डॉ. आरएल शर्मा वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, मुंगेली के द्वारा किया गया।



















