भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने जारी विज्ञप्ति में बताया है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा49(6) के नियमों के बहाने मध्यप्रदेश शासन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन को अंधेरे में रखकर पेंशनरों के बजट आबंटन के आड़ में आपसी सहमति के नाम पर गत 21 वर्षो से छत्तीसगढ़ को लूटा जा रहा है और इन बातों से अनजान छत्तीसगढ़ सरकार पृथक राज्य बनने के बाद अपने खजाने से अब तक अरबों रुपये लुटा चुकी है। इन बातों की जानकारी में होने के बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य के व्यूरोक्रेटस ने राज्य को हो रहे अरबों रुपये की हानि से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अनजान में रखा हुआ है। इसलिये छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर फेडरेशन ने निर्णय लिया है मुख्यमंत्री के भेंट-मुलाकात के प्रदेश व्यापी दौरा कार्यक्रम में जिला, तहसील,विकासखण्ड जहाँ भी भेंट-मुलाकात के अवसर मिलेंगे छत्तीसगढ़ के खजाने को लूट से बचाने सारी बातों से ध्यानाकर्षण कर अवगत कराएंगे और राज्य के पेन्शनर को 34 प्रतिशत महंगाई राहत तत्काल देने की मांग करेंगे। जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि अधिनियम में आपसी सहमति की संवैधानिक बाध्यता बताकर प्रत्येक पेंशनर को नियमानुसार 74 प्रतिशत राशि मध्यप्रदेश द्वारा और 26 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ द्वारा दिया जाना है अर्थात अनुमानित रूप से मध्यप्रदेश में 5 लाख और छत्तीसगढ़ में 1लाख पेंशनर्स है। यदि प्रत्येक पेन्शनर को 100 रुपये देना ही तो दोनों राज्यों के कुल 6 लाख पेंशनर को मध्यप्रदेश से 74 प्रतिशत और इन्ही सभी पेंशनरों को 26 प्रतिशत छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने से बजट देने होते हैं। हिसाब लगाने पर इसमें मध्यप्रदेश को 44 करोड़ 44 लाख व्यय करना पड़ेगा और छत्तीसगढ़ सरकार को 1करोड़ 56 लाख व्यय होगा। परन्तु यदि मध्यप्रदेश अपने 5 लाख पेंशनर को 100 प्रतिशत भुगतान करता है उसे 5 करोड़ और छत्तीसगढ़ सरकार अपने 1 लाख पेंशनरों के केवल 1 करोड़ खर्च करने होंगे। इस तरह केवल 100 रुपये के भुगतान में ही छत्तीसगढ़ शासन को 56 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार जानबूझकर 21साल से पेंशनरी दायित्व को टालते आ रही है। उन्होंने आगे बताया है कि चूंकि दोनों ही राज्यों में पूर्व में एक ही राजनीतिक दलों की सरकार होने से मिलीभगत के कारण मामलें का जानबूझकर निराकरण नही किया गया परन्तु अब वर्तमान में मध्यप्रदेश में भाजपा की और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी बंटवारे का मामला क्यों लंबित है, जबकि पेंशनरी दायित्वों का बंटवारा नहीं होने से छत्तीसगढ़ शासन को भारी आर्थिक क्षति हो रहा है, इस महत्वपूर्ण मामले से राज्य में जिम्मेदार ब्यूरोक्रेट्स द्वारा सरकार को अंधेरे में रखे हुए है। अत: छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स महासंघ रायपुर के आव्हान पर छत्तीसगढ़ राज्य के 5 पेंशनर्स संगठन क्रमश: छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ, पेंशनर्स एसोसिएशन , भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश तथा पेन्शनर समाज ने प्रदेश में मुख्यमंत्री को 4 मई 22 से प्रस्तावित दौरे के दौरान इन सारी बातों से अवगत कराने ज्ञापन देने का निर्णय लिया है।

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