अमलेश्वर (पाटन)। हरेली त्यौहार में सावन की अमावस्या रात्रि में ग्रामीणों में यह मान्यता है कि इस रात्रि को बेर के पेड़ में डायन (टोनही) निकलती है। तांत्रिक लोग भी अपने तंत्र साधना के लिए रात्रि में निकलते है। कुछ साधक लोग बेर पेड़ के नीचे सिंदूर धजा रखते है। बेर के पेड़ में काली और सफेद चुड़ी बांध देते है और टोनही को वश में करने का प्रयास करते है। जबकि छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद को अंधविश्वास कहता है। इसी उद्देश्य से हरेली की रात्रि को परिषद के सदस्य ग्राम कापसी पाटन ब्लाक में गये और डायन टोनही भूत प्रेत को मनुष्य का डर एवं वहम बताया। परिषद के सदस्यों ने ग्रामीणों को विज्ञान के माध्यम से अनेक प्रयोग कर जैसे नीबू से खून, नारियल में आग, और मंत्रों से अग्रि प्रज्जवलित कर दिया। साथ ही ढोंगी बाबा से बचने की सलाह दी। साथ ही विश्वयापी कोरोना महामारी के प्रति जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ.आरके सुखदेवे, रतन गोडने, सुनील गणवीर, विजय टंडन, डॉ. अश्विनी साहू, प्रभु यादव, डिगेश्वर मानिकपुरी, आशा कौशिक, दुर्गा झा, दुजराम भास्कर, गीतालाल साहू, मिथुन बंजारे उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एलपी बेनर्जी एवं आभार एवं अध्यक्षता सरपंच आंबेडकर जोशी ने किया।

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