रामचरित मानस में भगवान राम के प्रिय भक्तों एवं पात्रों की लंबी सूची है, जैसें केंवट, निषाद राज, शबरी, जटायु, हनुमान, जामवंत, विभीषण, त्रिजटा, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न एवं साधु समुदाय। इन सभी भक्त पात्रों में श्रीराम ने हनुमान जी को सबसे उपर रखा है। हनुमान का शाब्दिक अर्थ होता है, जिन्होंने अपने मान या अहंकार का हनन कर लिया हो। हनुमान जी सकल गुण के निधान व ज्ञानियों में अग्रगण्य है, प्रभु के परम सेवक माने जाते है। भक्ति स्वरुपा माता जानकी की खोज के लिए प्रभु ने इन पर ही ज्यादा विश्वास कर सोने की रामनाम अंकित मुद्रीका दी जिन्हे मुख में दबाकर आप 100 योजन समुद्र पार कर लंका मेें माता जानकी का पता लगाकर, लंका जलाकर, विभीषण से मित्रता करके, और माता जानकी से चूड़ामणि, पहिचान लेकर वापस प्रभु श्रीराम के पास लौटे। श्रीराम ने सीता जी की सुध पाते ही हृदय से इनका आभार प्रदर्शन करते हुए इनकी तुलना भाई भरत से की है, तथा इन्हे सबसे बड़ा परोपकारी कहा। सुंदर कांड में सीता जी की खोज के बाद प्रभु श्रीराम ने कहा-
सुन कपि तव समान उपकारी
नही कोई सुर, नर, मुनि, तनु धारी
प्रत्योपकार करंव का तोरा
सन्मुख होई न सकल मन मोरा

अर्थात् हे हनुमान जी आज आप से बड़ा पर उपकार करने वाला इस संसार में कोई तनधारी, देवता, मनुष्य व मुनि समुदाय में कोई भी नहीं है।
मैं आपके इस उपकार के बदले में क्या कर सकता हूं, मेरे मन भी आपके संमुख होने से घबराता है।
हनुमान जी के इन 8 कार्यों को हनुमान अष्टक में महामंत्र में बाबा तुलसीदास ने जी ने सुंदर अष्ट लिखा है कि
1 बाल्य काल में आपने सूरज को लाल मधुर फल समझ कर निगल गया जिससे तीनों लोक अंधकारमय हो गया फिर देवतागण आपके पास आकर गिड़गिड़ाये तब आपने सूर्यनारायण को कष्ट से जगत को बचाने, मुख से बाहर किये।
2 बाली के भय से सुग्रीव ऋषिमुख पर्वत आश्रय लिया था वहां आपने सेवक का कर्तव्य निभाते हुए, ब्राम्हण वेष धारण कर राम और लक्ष्मण को कंधे पर बिठाकर कर पर्वत के उपर लाये और सुग्रीव से मित्रता कराई।
3 सीता जी की खोज में आप युवराज अंगद दल में दक्षिण दिशा की ओर गये थे, जहां सुग्रीव का आदेश था कि यदि 1 माह की अवधि में जानकी जी का पता लगाकर आप लोग न लौटे तो सबसे जिंदा नहीं रहने दूंगा, या मार डालूंगा।
4 रावण अशोक वाटिका में माता जानकी को डराने लगा और सभी राक्षसियों को कहा इन्हे यातना दो, तभी आपने प्रभु की मुद्रीका माता जी को देकर शोक से मुक्त कराया।
5 जब लंका समर में मेघनाथ ने लक्ष्मण जी को शक्ति बाण मारकर मूर्छित कर दिया तब आपने घर सहित वैद्य सुषेन को उठाकर उनके आदेश पर द्रोणगिरी पर्वत पर्वत को उठाकर संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाये।
6 रावण लंका युद्ध में नाग फास से राम व लक्ष्मण को बांध दिये तब हनुमान जी आपने गरुड़ जी को लाकर बंधन कटा कर मुसीबत से प्रभु व लक्ष्मण को उबारा।
7 जब अहिरावण राम लक्ष्मण को, पताल लोक में ले जाकर बली देने के लिए देवी के सामने तैयारी कर मंत्र जाप करने लगा तब आपने पताल लोक जाकर, सैन्य सहित अहिरावण को मारकर दोनों भाई राम रावण के प्राण बचाये।
8 आपने बड़े-बड़े देवताओं का कार्य किये है, तुलसीदास जी कहते है कि कौन सा मेरा छोटा सा कार्य जो आपसे करते नहीं बनता, हे हनुमान जी जल्द ही मेरे जीवन के छोटे संकट को दूर करिये आपको दुनिया जानती है कि आप संकटमोचन है।


0 ताम्रध्वज वर्मा दीनदयाल उपाध्याय आवास कालोनी मंगला, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031