भारत के 76वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर करीब 20 करोड़ घरों पर तिरंगा फहराने के लिए पूरे देश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया गया. इसके बाद अब सवाल यह खड़ा किया जा रहा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद 20 करोड़ तिरंगा झंडा कहां गए, उनका किस प्रकार से रखरखाव किया जा रहा है या उनका निपटारा कैसे किया गया?

ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबार द गार्जियन की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में सवाल खड़ा किया गया है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के लोगों से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा खरीदने और उसे अपने घरों पर गर्व के साथ फहराने का आग्रह किया गया था. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 करोड़ घरों पर तिरंगा झंडा फहराने की अपील की थी, लेकिन अब सवाल यह पैदा होता है कि वे सभी तिरंगा झंडा को उचित सम्मान के साथ कैसे उतारते हैं?

गांव के हर घर पर फहराया गया तिरंगा- द गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले सप्ताह सोमवार को स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ समारोह से पहले भारत की सड़कों के किनारे घरों, संस्थानों, झुग्गी-झोपड़ियों और यहां तक कि दूर-दराज में स्थित पहाड़ों की चौकियों पर भी तिरंगा फहराया गया. मुक्तेश्वर के निवासी कृष्ण चंद्र ने कहा कि मेरे जीवन में गांव के स्कूलों में तिरंगा फहराया जाता रहा है, न कि किसी घर पर. इस समय मेरे गांव के प्रत्येक घरों के बाहर तिरंगा फहराया गया.

तिरंगे का निपटारा करना आसान नहीं- रिपोर्ट में कहा गया है कि तिरंगा झंडा कहां और कैसे फहराया जाना चाहिए, इसके लिए बाकायदा कायदे-कानून बने हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय गौरव को प्रदर्शित करने के लिए सरकार द्वारा जानबूझकर सख्त नियमों में ढील दी गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि इस दौरान कितने तिरंगा खरीदे गए, लेकिन उन्होंने एक अनुमान के आधार पर बताया कि यह 20 करोड़ से अधिक हो सकता है. अब सवाल यह पैदा होता है कि उनका निपटारा कैसे किया जाए. भारत के अधिकांश लोगों को यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि यह उतना आसान नहीं, जितना वे सोचते हैं.

कचरे के डिब्बे में नहीं फेंक सकते तिरंगा- द गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि लखनऊ के नगरपालिका क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर को कचरे में फेंक दिया गया था. कचरों की सफाई के दौरान इन दोनों की तस्वीरों को कचरे में पाए जाने के बाद सफाईकर्मी को उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने बर्खास्त कर दिया था. हालांकि, बाद में उसे बहाल कर दिया गया. अब सवाल यह पैदा होता है कि जब लखनऊ में नेताओं की तस्वीरों को कचरे में फेंके जाने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है, तो क्या तिरंगे को कचरे के डिब्बे में डालना इतना आसान है?

क्या कहता है कानून- द गार्जियन की रिपोर्ट में राष्ट्रीय ध्वज संहिता 2022 के हवाले से कहा गया है कि जब झंडा क्षतिग्रस्त या गंदा हो जाता है, तो उसे एक तरफ नहीं फेंका जाना चाहिए या उसका अनादरपूर्वक निपटान नहीं किया जाना चाहिए. इसमें कहा गया है कि क्षतिग्रस्त या गंदा होने पर तिरंगा को मिट्टी में दबाकर या जलाकर इसका निस्तारण किया जाना चाहिए, ताकि तिरंगा को किसी प्रकार की ठेस न पहुंच सके.

क्या करने की है मनाही – रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इसे जलाना है, तो चुनी हुई जगह को साफ सुथरा होना चाहिए. झंडा पकड़ना, माचिस जलाना और उसके एक सिरे पर आग लगाना मना है. पहले इसे मोड़ना चाहिए और एक बार आग लगने के बाद इसे सावधानी से आग की लपटों के बीच में रखना चाहिए. इसे पहले तह किए बिना आग की लपटों में डालना एक अपराध है.

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