गिरने की वजह से बुरी तरह चोटिल हुए और दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दिमागी तौर पर मृत घोषित 16 महीने के बच्चे के परिवार ने उसके अंगदान किये हैं जिनसे दो रोगियों को जीवन की नयी उम्मीद मिली है. एम्स के चिकित्सकों के अनुसार यह बच्चा एम्स में सबसे कम उम्र का अंगदाता है. उन्होंने बताया कि बच्चे के गुर्दों और यकृत को दो अन्य बच्चों को लगाया गया है, वहीं उसके हृदय वाल्व तथा कॉर्निया एम्स में सुरक्षित रखे गये हैं. रिशांत नामक बालक 17 अगस्त को गिर गया था और गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसके पिता उपिंदर उसे जमुना पार्क के एक निजी अस्पताल में ले गये जहां से उसे उसी दिन एम्स में जयप्रकाश नारायण ट्रॉमा सेंटर लाया गया. एम्स में न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉ दीपक गुप्ता ने कहा, बच्चा अंगदान के लिए ही जन्मा था. सिर में गहरी चोट लगने के बाद वह आठ दिन तक लड़ता रहा. सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा कि एक 16 महीने का बच्चा जन्माष्टमी से एक दिन पहले 30 फीट की ऊंचाई से गिर गया और उसके मस्तिष्क में गंभीर चोटें आई. उसे निगरानी में रखा गया था, लेकिन कोई गतिविधि नहीं दिखाई दी. 7 दिनों के बाद हमने उसे ब्रेन डेड पाया. उन्होंने कहा कि हमने बच्चे के परिवार को उसके अंग दान करने के लिए मनाया. मृत बच्चे की किडनी 5 साल के बच्चे में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया और 6 महीने के बच्चे में लीवर ट्रांसप्लांट किया गया. इस सप्ताह कॉर्निया 2 नेत्रहीन बच्चों में प्रत्यारोपित होगा. उसे 24 अगस्त को मस्तिष्कीय रूप से मृत घोषित कर दिया गया था. चिकित्सकों और एम्स स्थित अंग प्रतिरोपण समन्वयकों ने शोक-संतप्त परिवार से बातचीत की और अंगदान की जानकारी दी. जिसके बाद परिवार ने बच्चे के अंगों और ऊतकों को दान करने का फैसला किया.

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