भारत में लाखों की संख्या में चर्चा है और बात गोवा की करें तो वहां पर हजारों की संख्या में चर्च है. भारत के सभी चर्च में कुछ ना कुछ ऐसा है जिसके कारण वो एक दूसरे से अलग हैं. लेकिन पुराने गोवा में एक ऐसा चर्चा है जो भारत में मौजूद सभी चर्च से पूरी तरह से जुदा है.

इस चर्च में एक ईसाई संत की डेड बॉडी को बीते 450 सालों से सहेज कर रखा गया है. माना जाता है कि इस डेड बॉडी में कई दिव्य शाक्तियां मौजूद हैं और इसमें से आज भी खून निकलता है.

पुराने गोवा में ‘बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस नामक एक चर्च है. इस चर्च में सभी धर्मों के लोग आते हैं. हर साल 6-9 फरवरी तक गोवा में चलने वाले कार्निवल में इस चर्च में हजारों की संख्या में लोग आते हैं. गोवा के पणजी में स्थित इस चर्च में ही बीते 450 सालों से फ्रांसिस जेवियर नामक शख्स की बॉडी रखी हुई है.

कहा जाता है कि फ्रांसिस जेवियर की डेड बॉडी में आज भी दिव्य शाक्तियां मौजूद हैं, जिसके कारण यह खराब नहीं होती है. हर 10 साल बाद लोगों के दर्शन के लिए यह बॉडी रखी जाती है. इस बॉडी को कांच के ताबूत में रखा गया है औप आखिरी बार साल 2014 में इसे लोगों के दर्शन करने के लिए रखा गया था. फ्रांसिस जेवियर का जन्म 7 अप्रैल 1506 ई. को स्पेन में हुआ था. फ्रांसिस जेवियर संत बनने से पहले एक सिपाही थे और वो इग्नाटियस लोयोला के छात्र थे. माना जाता है कि इग्नाटियस लोयोला जीसस के आदेशों के संस्थापक थे.

गोवा पर जब पुर्तगालियों का राज था, तब वहां के राजा जॉन थर्ड और उस वक्त के पोप ने जेसुइट मिशनरी बनाकर फ्रांसिस जेवियर को गोवा में धर्म के प्रचार के लिए भारत भेजा था. उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि चीन और जापान समेत आस-पास के देशों में ईसाई धर्म की लोगों को दीक्षा दी थी. फ्रांसिस जेवियर जब चीन की यात्रा पर जा रहे थे, उस दौरान उनकी मौत हुई थी. माना जाता है कि सेंट जेवियर ने अपने आखिरी दिनों में कहा था कि अपने शिष्यों को गोवा में ही शव दफनाने के लिए कहा था.

इसके बाद सेंट जेवियर के शिष्यों ने उनके शव को गोवा में ही दफना दिया. लेकिन सालों बाद रोम से कुछ संतों का एक डेलिगेशन वापस आया था, जिसके बाद उनके शव को कब्र से बाहर निकाला गया था और उसके बाद उनके शव को वापस दफनाया गया था. सेंट जेवियर के शव को तीन अलग अलग बार कब्र से बाहर निकाला गया था.

कहा जाता है कि उनका शरीर आज भी उसी अवस्था में है, जैसा पहली बार था. एक महिला का दावा था कि उसने एक बार सेंट जेवियर के पैरों में सुई चुबाई थी तब वहां से खून निकलने लगा था. कहा जाता है कि अपनी मृत्यु से पहले सेंट जेवियर ने अपनी शाक्तियों से अपना एक हाथ अपने शरीर से अलग कर दिया था. यह हाथ आज भी इसी चर्च में मौजूद है.

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