नई दिल्ली। कोरोना को लेकर हर रोज कई नई बातें सामने आ रहीं है। पूरी दुनिया इसकी वैक्सीन ढूंढऩे में जुटी हुई है। काफी सारे देशों ने इसके खिलाफ वैक्सीन ढूंढऩे का दावा भी किया है और जल्द ही इसकी वैक्सीन बाजार में लाने की बात भी कही है। लेकिन सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने मुख्यालय से वर्चुअल न्यूज ब्रीफिंग के जरिए बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ कुछ वैक्सीन के नतीजे उम्मीद के मुताबिक मिले हैं, लेकिन शायद इससे कोविड-19 के प्रभावी इलाज की मंजिल तक नहीं पहुंचा जा सकता। दुनिया के हालात सामान्य होने में अभी बहुत वक्त लगेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोसअधानोम घेब्रेयेसस और आपातकालीन प्रमुख माइक रायन ने दुनिया की सरकारों पर जोर देते हुए कहा कि, उन्हें सख्त कदम उठाने होंगे। मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोना और जरूरत पडऩे पर टेस्ट कराने पर ध्यान देना होगा। उन्होनें कहा कि सभी लोग और सरकारों तक ये संदेश बहुत स्पष्ट है यानी हर मुमकिन कदम उठाएं। बहुत सारी वैक्सीन इस वक्त तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि लोगों को इन्फेक्शन से बचाने के लिए जल्द इसकी दवाई बन जाएंगी। मगर इसके बावजूद इस वक्त कोरोना का कोई रामबाण इलाज नहीं है और शायद कभी होगा भी नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपातकालीन प्रमुख माइक रायन ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों के लिए अभी खतरें की बात है। क्योंकि इन देशों मे ट्रांसमिशन रेट ज्यादा है,अभी इससे बाहर निकलने का रास्ता लंबा है और इसमें प्रतिबद्धता की जरूरत है। आखिर में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और चीन के विशेषज्ञों की बड़ी टीम फिर से वुहान जा कर वायरस की उत्पत्ति के बारे में शोध करेगी। बता दें कि 10 जुलाई को वुहान गई विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की टीम ने अपना मिशन पूरा कर लिया है और अब टीम वापस जाकर कोरोना वायरस के इंसानों तक पहुंचने के कारण को पता करेगी। (एजेंसी)
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