झारखंड के रांची जिले में एक ऐसा गांव है जहां इंसानों से 10 गुना ज्यादा बकरियां रहती हैं। गांव में हर जगह बकरियां ही नजर आती है। वहीं, इस गांव को बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने गोद भी ले रखा है।

90 प्रतिशत घर बकरी पालन से चलते हैं -मामला जिले से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चामगुरु गांव का है। इस गांव में करीब 300 घर हैं और 1000 लोग रहते हैं, लेकिन बकरियों की संख्या 10,000 से भी अधिक है क्योंकि यहां हर घर में 30 से 45 बकरियां हैं क्योंकि इस गांव में 90 प्रतिशत घर बकरी पालन से चलते हैं। घर के छोटे बच्चे से लेकर बड़े तक हर कोई बकरी चराते हैं क्योंकि उनकी एक यही रोजी-रोटी है।

“बकरी नहीं पालेंगे तो और क्या करेंगे” – ग्रामीण विमला देवी का कहना है कि गांव को यूनिवर्सिटी ने गोद ले रखा है, जिससे बकरी पालन में सुविधा होती हैं। पहले बकरी के लिए दवा व खाने का इंतजाम करना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता था, लेकिन यूनिवर्सिटी के सहयोग के चलते हमें ज्यादा तकलीफ नहीं होती। विमला देवी ने बताया कि छोटे बच्चों को तो कायदे से स्कूल जाना चाहिए, लेकिन गरीबी इतनी है कि ना चाहते हुए भी बकरी के साथ खेत पर भेजना पड़ता है। हमने शुरू से सिर्फ बकरी पाली है। बकरी नहीं पालेंगे तो और क्या करेंगे।

“शादी से लेकर बच्चों की पढ़ाई -लिखाई की जाती बकरी बेचकर” -ग्रामीण इरफान अंसारी कहते हैं कि हमारे गांव में शादी से लेकर बच्चों की पढ़ाई -लिखाई सब बकरी बेचकर की जाती है। हमारे लिए बकरी एटीएम मशीन है जब पैसे की जरूरत पड़ती है तब बकरी बेच देते हैं। बकरी अधिकतर मार्केट में बेची जाती है व शादी-ब्याह व पर्व के मौके पर घर से ही लोग खरीद कर ले जाते हैं। पर्व त्यौहार के मौके पर अधिक बिक्री होती है। वजन के हिसाब से बकरी को बेचा जाता है।

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