रायगढ़ । आदिम जाति कल्याण विभाग में हुए नियमितीकरण में अनियमितता की कहानी प्याज के छिलकों की तरह सामने आ रही है। अब मामला शिक्षा विभाग से भी जुड़ गया है। 2013 में विभाग में फर्जी अंकसूची का भांडा फूटा था। इसमें जिन 246 आवेदकों की मार्कशीट फर्जी मिली, वही नियमितीकरण का लाभ पा चुके हैं। जबकि सत्यापन के बाद इनके विरुद्ध एफआईआर की जानी थी।

वर्ष 2013 में आजाक विभाग में कलेक्टर दर पर चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान 246 आवेदकों के पांचवीं कक्षा की मार्कशीट डुप्लीकेट मिली। कुछ की जांच हुई तो पता चला कि वास्तविक में वे पांचवीं पास ही नहीं थे, कुछ के अंक बहुत कम थे जिसे बढ़ाकर डुप्लीकेट बनाया गया था।

मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी जिसके बाद बड़े हल्दी निवासी मनेश साव और रामलाल साव को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद सभी के अंकसूची को सत्यापन के लिए शिक्षा विभाग में भेजा गया था। वहां से कोई रिपोर्ट ही नहीं आई और इधर 2022-23 में सभी को नियमित कर दिया गया। नियमत: इन्हें तीन साल बाद 2016-17 में नियमित किया जाना था, लेकिन ढाई सौ कर्मचारी तो ड्यूटी से गायब मिले। इन्हें नियमित करने के लिए आजाक विभाग ने बहुत शातिर तरीके से काम किया।

गायब अवधि को ही कार्रवाई से हटाकर नए डेट पर नियमित कर दिया। कहा जा रहा है कि जिस अवधि में ये गायब थे, उसका लाभ नहीं दिया जा रहा है। जो काम पर आए ही नहीं, उनको बुलाकर नियमित किया गया।

अब करवा रहे दस्तखत – जो लोग कार्यस्थल पर उपस्थित ही नहीं हुए, उन्हें नियमित करने के पूर्व मामला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। अनुमोदन के बिना ही सहायक संचालक और प्रभारी सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास ने नियमितीकरण की फाइल बढ़ा दी। इनके मार्कशीट का सत्यापन भी नहीं हो सका है।

सूत्रों के मुताबिक अब कुछ कर्मचारियों को बैक डेट पर रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करने के लिए कहा जा रहा है। कुछ छात्रावासों में साइन भी कराए जा रहे हैं। इसकी जांच हुई तो गरियाबंद की तरह यहां भी गड़बड़ी मिलेगी।

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