हमारे देश में हर घर में कोई न कोई मंदिर जरूर होता है. क्योंकि हिंदू धर्म में घर में मंदिर का होना बहुत ही पवित्र माना जाता है. ये इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि जब कभी मंदिर न जा पाएं तो घर के मंदिर में ही पूजा पाठ कर लें. वैसे तो घर में मंदिर में रोजाना ही पूजा-पाठ किया जाता है. जिससे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे और परिवार के सदस्य तरक्की करते रहें. लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करने के बाद भी उसका उचित परिणाम नहीं मिलता. और कामयाबी की जगह असफलता ही हाथ आती है. इसके अलावा सुख चैन में भी अड़चने आने लगती है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक ऐसा होना आपके घर में वास्तु दोष होने का संकेत देता है. हिंदू धर्म में भगवान के मंदिर का खास महत्व माना जाता है. घर में मंदिर बनाने के लिए एक विशेष स्थान होता है. हर कोई घर के मंदिर को अपने हिसाब से डेकोरेट करके रखता है. हिंदू धर्म में कहा गया है कि किसी काम को करने से पहले भगवान को याद करते हुए हाथ जोडऩे चाहिए. उनकी पूजा करने का विशेष महत्व है. लेकिन घर में मंदिर बनवाते समय या रखते वक्त सही दिशा और स्थान का चुनाव करना बेहद जरूरी है. यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपके घर पर कभी भी पॉजिटिव एनर्जी नहीं आएगी.घर में हमेशा वास्तु के हिसाब से मंदिर होना चाहिए. आपने देखा होगा कि कई बार पूजा पाठ करने के बाद भी घर में खुशियां नहीं आ पाती हैं. घर में अशांति का माहौल बना रहता है. ऐसे में बहुत जरूरी है कि घर में मंदिर रखने से पहले वास्तु के इन नियमों को अच्छे से जान लें. वास्तु के मुताबिक मंदिर को स्थापित करने के लिए आपको घर के सबसे शुभ स्थान ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा को चुनना चाहिए. यह दिश भगवान के मंदिर को रखने के लिए सबसे बेस्ट होती है. इसी के साथ मंदिर की सही दिशा के साथ साथ आपको दिशा का भी ध्यान रखना है. इसी के साथ तस्वीर की पूजा करते वक्त प्रतिमा का मुंह ईस्ट दिशा में होना चाहिए. यदि ईस्ट दिशा में मुंह नहीं रख सकती तो वेस्ट दिशा भी शुभ है. इन दोनों दिशा में जब मुंह करके पूजा पाठ करते हैं तो आप ध्यान केंद्रित करते पूजा कर सकते हैं.

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