ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वटसावित्री व्रत किया जाता है। इस बार ये दिन 19 मई को है। ये दिन इस बार शुक्रवार को पड़ रहा है इसलिए और भी पावन हो गया है। इस दिन वट वृक्ष और मां सावित्री की पूजा की जाती है। ये व्रत सुहागिन महिलाएं करती हैं। इस व्रत को करनी वाली महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती होने का सुख मिलता है। कहीं-कहीं कुछ अविवाहित महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनचाहा पति प्राप्त होता है। इस दिन विशेष आरती करने से महिलाओं को दांपत्य सुख के साथ यशस्वी पुत्र की मां बनने का भी आशीष प्राप्त होता है।

वट सावित्री पूजा 19 मई को कृष्ण पक्ष की अमावस्या प्रारंभ 18 मई 2023 को रात 9 बजकर 42 मिनट पर कृष्ण पक्ष की अमावस्या खत्म 19 मई 2023 को रात 9 बजकर 42 मिनट पर उदया तिथि की वजह से वट सावित्री पूजा 19 मई दिन शुक्रवार को है।

वट सावित्री व्रत की आरती

अश्वपती पुसता झाला।। नारद सागंताती तयाला।।

अल्पायुषी सत्यवंत।। सावित्री ने कां प्रणीला।।

आणखी वर वरी बाळे।। मनी निश्चय जो केला।।

आरती वडराजा।।1।। दयावंत यमदूजा।

सत्यवंत ही सावित्री। भावे करीन मी पूजा।

आरती वडराजा ।।धृ।। ज्येष्ठमास त्रयोदशी।

करिती पूजन वडाशी ।। त्रिरात व्रत करूनीया।

जिंकी तू सत्यवंताशी। आरती वडराजा ।।2।।

स्वर्गावारी जाऊनिया। अग्निखांब कचळीला।।

धर्मराजा उचकला। हत्या घालिल जीवाला। येश्र गे पतिव्रते।

पती नेई गे आपुला।। आरती वडराजा ।।3।।

जाऊनिया यमापाशी। मागतसे आपुला पती।

चारी वर देऊनिया। दयावंता द्यावा पती। आरती वडराजा ।।4।।

पतिव्रते तुझी कीर्ती। ऐकुनि ज्या नारी।। तुझे व्रत आचरती।

तुझी भुवने पावती।। आरती वडराजा ।।5।। पतिव्रते तुझी स्तुती।

त्रिभुवनी ज्या करिती।। स्वर्गी पुष्पवृष्टी करूनिया। आणिलासी आपुला पती।।

अभय देऊनिया। पतिव्रते तारी त्यासी।। आरती वडराजा ।।6।।

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