दुनियाभर में जब से कोरोना वायरस महामारी फैली है, तभी से यह सवाल उठता रहा है कि क्या किसी मां द्वारा शिशु को दूध पिलाए जाने पर उसे कोरोना वायरस हो सकता है? इसको लेकर हाल में की गई एक स्टडी में इसका जवाब मिला है। यह जवाब है- नहीं। स्टडी में बताया गया है कि यदि कोई मां स्तन के माध्यम से शिशु को दूध पिलाती है तो फिर बच्चे को कोरोना से संक्रमित होने की संभावना नहीं है। यह स्टडी जामा के ऑनलाइन एडिशन में प्रकाशित की गई है। इसे यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डियगो स्कूल ऑफ मेडिसन के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है।

स्टडी में दूध के उन 64 सैंपल्स की जांच की गई, जिन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित अमेरिका की 18 महिलाओं के स्तनों से अनुसंधान बायोरेपोजिटरी द्वारा एकत्र किए गए थे। यद्यपि, जांच में एक सैंपल पॉजिटिव पाया गया, लेकिन बाद में पता चला कि यह शिशु में संक्रमण पैदा करने में असमर्थ था। स्टडी के सह-प्रमुख क्रिस्टीना चेम्बर्स ने कहा, वायरल आरएनए का पता लगाना संक्रमण के बराबर नहीं है। इसे बढऩे और संक्रामक होने के लिए गुणा करना होगा और हमें यह नहीं मिला। उन्होंने कहा, हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि स्तन का दूध शिशु के लिए संक्रमण का स्रोत नहीं है। हालांकि, स्तनपान से पहले महिलाओं को अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोने और सैनिटाइज करने की सलाह दी जाती है।

वहीं, स्टडी से जुड़े एक अन्य सह-मुख्य जांचकर्ता ग्रेस एल्ड्रोवंडी ने कहा, डेटा के अभाव में, कोरोना से संक्रमित कुछ महिलाओं ने सिर्फ स्तनपान नहीं करने के लिए चुना है। उन्होंने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि हमारे परिणामों और भविष्य की स्टडीज से महिलाओं को शिशुओं को स्तनपान कराने के भरोसे को और बल मिलेगा। इसके अलावा, शुरुआती समय में शिशु को स्तनपान कराने से शिशु मृत्यु सिंड्रोम और मोटापे का जोखिम कम होता है। इसके साथ ही बच्चे की आगे की सेहत भी बेहतर होती है। वहीं, सैंपल्स को 30 मिनट के लिए 62.5 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया गया और फिर 4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया गया। पास्चराइजेशन के बाद, वायरस का पता नहीं चला। (एजेंसी)

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