45 साल पुराना पंचेश्वर महादेव मंदिर नाना चिलोदा सर्कल से हिम्मतनगर तक राजमार्ग पर स्थित है। मंदिर का नाम पंचेश्वर महादेव रखा गया, क्योंकि इसमें भोलानाथ और भगवान गणेश सहित पांच देवता हैं। श्रावण माह के दौरान यह शिवालय 20 वर्षों से भक्तों को तुलसी और बेल के पौधे प्रसाद में दिया जाता है। पंचेश्वर महादेव इस बात से अन्य धार्मिक स्थलों से अलग है कि इस मंदिर में दान पेटी और दान दोनों प्रतिबंधित हैं।
पर्यावरण और भक्ति का अनोखा संगम – प्रतिदिन लगभग 200 तथा शनिवार, रविवार तथा सोमवार को 500 श्रद्धालु दर्शन कर पौधे घर ले जाते हैं। इन्हें घर और बालकनी में लगाते ही वातावरण और भक्ति का अनोखा संगम निर्मित हो जाता है। आजकल शहरों में लोग तुलसी के पौधे उगाना पसंद करते हैं क्योंकि घर के पास बेल का पेड़ लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती है। पहले शिवरात्रि पर मंदिर के बाहर मेला लगता था, लेकिन पास की खाली जगह पर सड़क बन जाने से मेले का चलन बंद हो गया है।
सुबह-शाम भोलेनाथ की आरती करते हैं आदिवासी और मुस्लिम सेवक – बलवंतभाई आदिवासी 22 वर्षों से जाति और धर्म के भेदभाव के बिना सुबह और रात भगवान शिव की आरती और सेवा पूजा करते आ रहे हैं। साथ ही उनके न रहने पर छाछा गांव के मुस्लिम भाई जो वहां जमादार के पद पर कार्यरत हैं, वे भी स्वेच्छा से भोलेनाथ की आरती करते हैं। शिवालय में आने वाले सभी लोग मानव धर्म की डोर से बंधे होते हैं।














