प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दोनों सदनों के नए भवन में स्थानांतरित होने के बाद पुराने संसद भवन का नाम ‘संविधान सदन’ रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जिस भवन में पिछले 75 वर्षों से संसद सत्र आयोजित होते रहे हैं, उसे केवल पुरानी इमारत कहकर इसकी गरिमा कम नहीं होनी चाहिए। प्रधान मंत्री ने कहा, इमारत को ‘संविधान सदन’ के रूप में संदर्भित करना उन नेताओं को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने संसद में इतिहास बनाया। उन्होंने कहा, “हमें भविष्य की पीढय़िों को यह उपहार देने का अवसर नहीं छोडऩा चाहिए।” पीएम मोदी संसद के सेंट्रल हॉल में नई बिल्डिंग में शिफ्ट होने से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह बदलाव मंगलवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर पांच दिवसीय विशेष संसद सत्र के दूसरे दिन हुआ। पुराने संसद को लेकर मोदी ने कहा कि यह भवन और उसमें भी यह सेंट्रल हॉल, एक प्रकार से हमारी भवानाओं से भरा हुआ है। हमें भावुक भी करता है और हमें कर्तव्य के लिए प्रेरित भी करता है। आजादी के पूर्व यह खंड एक तरह से लाइब्रेरी के रूप में इस्तेमाल होता था। आजादी के बाद में संविधान सभा की बैठकें यहां हुईं और संविधान सभा की बैठकों के द्वारा गहन चर्चा के बाद हमारे संविधान ने यहां आकार लिया। यहीं पर 1947 में अंग्रेजी हुकूमत ने सत्ता हस्तांतर किया। उस प्रक्रिया का साक्षी यह सेंट्रल हॉल है। इसी सेंट्रल हॉल में हमारे तिरंगे, राष्ट्रगान को अपनाया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस एतिहासिक अवसरों पर आजादी के बाद अनेक अवसर आए जब दोनों सदनों के मिलकर भारत के भाग्य को गणने के लिए सहमती बनाई। 1952 में करीब 42 राष्ट्राध्यक्षों ने इस सेंट्रल हॉल में संबोधित किया है। हमारे राष्ट्रपति महोदयों द्वारा 86 बार संबोधित किया गया… दोनों सदनों ने मिलकर करीब 4000 क़ानून पास किए हैं संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सबसे पहले परीपूर्ण करना चाहिए और यह हम से, हर नगारिक से शुरूआत होती है। एक समय ऐसा था कि लोग लिखते थे कि ‘मोदी आत्मनिर्भर की बात करता है, कहीं बहुपक्षीय के सामने चुनौती नहीं बन जाएगा।’ हमने पांच साल में देखा कि दुनिया भारत के आत्मनिर्भर मॉडल की चर्चा करने लगी है।” मोदी ने कहा कि आज भारत पांचवी अर्थव्यवस्था पर पहुंचा है लेकिन पहले 3 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
कभी न कम हो इसकी गरिमा’, संविधान सदन के नाम से जाना जाए पुराना संसद भवन
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