रायपुर। क्या जैविक खेती से खाद्य सुरक्षा संभव है?इस विषय पर आज यहाँ इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में कृषि महाविद्यालय, रायपुर के सेमिनार हॉल में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने पक्ष और विपक्ष में विचारोत्तेजक तथ्य और तर्क प्रस्तुत किये। इस मौके पर उपस्थित विद्याथियों ने तालियों से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। क्या जैविक खेती से खाद्य सुरक्षा संभव है के पक्ष में विचार रखते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि जैविक खेती से खाद्य सुरक्षा संभव है। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्परिणाम के बारे में तर्क के साथ बताया कि किस तरह यह हमारे लिए हानिकारक है। समय के साथ जैविक खेती की ओर आगे बढ़ना होगा। जैविक खेती से तत्काल खाद्य सुरक्षा संभव नहीं है, बल्कि इसे सिलसिलेवार तरीके से आगे बढ़ाना होगा। शुरुआत में थोड़ी समस्या जरुर आएगी लेकिन धीरे धीरे इससे फसल उत्पादन रासायनिक खेती के आस पास होने लगता है और खाद्य सुरक्षा संभव हो सकती है । विपक्ष में विचार रखते हुए प्रतिभागियों ने बताया कि जैविक खेती से खाद्य सुरक्षा संभव नहीं है। उन्होंने अपने तर्क में कहा कि भारत की जनसँख्या बहुत अधिक है। जैविक खेती के जरिये वांछित मात्रा में फसल उत्पादन नहीं किया जा सकता है, इसलिए इतने बड़े देश के लिए जैविक खेती से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं है। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा, निर्णायक डॉ. जी.के. श्रीवास्तव, डॉ. अजय गौराहा, डॉ. जी.पी. पाली, राजभाषा हिंदी प्रकोष्ठ प्रभारी श्री संजय नैय्यर तथा डॉ. राममोहन सावू उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत 14 सितंबर को नारा लेखन, 15 सितंबर को कविता लेखन प्रतियोगिता तथा 21 सितंबर को निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसी कडी में 29 सितंबर को हिंदी संगोष्ठी और पुरस्कार वितरण का आयोजन किया जाएगा। हिंदी पखवाड़ा का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण कार्यालय तथा राजभाषा हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

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